छत्तीसगढ़

विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में उठाया खाद की कमी मुद्दा

सरायपाली। क्षेत्रीय विधायक चातुरी नंद ने महासमुंद जिले के सोसायटियों में खाद की कमी एवं खाद की कालाबजारी को लेकर कृषि मंत्री रामविचार नेताम से विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से जानकारी ली।

विधायक चातुरी नंद के तारांकित सवाल के जवाब में कृषि मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि महासमुंद जिले में खरीफ वर्ष 2025 हेतु जून, 2025 तक सहकारी समितियों में छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ के संग्रहण केन्द्रो से कुल 35518 मी. टन रासायनिक उर्वरक एवं छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केन्द्रो से 30634.80 किंटल बीज का भंडारण किया गया है।

कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि महासमुंद जिले में 57070 मी. टन उर्वरक एवं 31955 क्विंटल बीज के प्राप्त लक्ष्य के विरूद्ध क्रमशः 22111 मी.टन उर्वरक एवं 25197.90 क्विंटल बीज वितरण किया गया है।

विधायक चातुरी नंद ने खाद एवं बीज की कमी, कालाबाजारी, अधिक दाम में बेचने या अन्य कोई शिकायत प्राप्त के संबंध में सवाल पूछा जिसके जवाब में मंत्री ने बताया कि कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

विधायक चातुरी नंद ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार प्रदेश में किसानों को खाद- बीज तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। खाद के लिए किसान सोसायटियों के चक्कर काटने मजबूर है। खाद की कमी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने पूरे प्रदेशभर में धारण प्रदर्शन किया और शिकायत सौंपे लेकिन विधानसभा में शिकायत प्राप्त नहीं होने की गलत जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने कहा है कि खरीफ की बुवाई का समय तेजी से बीत रहा है, लेकिन किसानों को डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है किसान परेशान है, सरकार के द्वारा किसानों को पहले एनपीके का विकल्प देने की बात कही गई और अब नैनो डीएपी का झांसा दे रहे हैं। असलियत यह है कि सरकार नहीं चाहती कि किसान भरपूर उत्पादन ले सके, ताकि समर्थन मूल्य पर कम धान खरीदी करना पड़े, यही वजह है कि खरीफ फसल की बोनी के ऐन वक्त पर खाद का कृत्रिम संकट उत्पन्न किया जा रहा है। जब किसानों के तरफ से डिमांड अप्रैल माह तक लिखाया जा चुका था, फिर सही समय में पर्याप्त मात्रा में खाद के रेक और सहकारी सोसाइटियों तक भंडारण की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

विधायक चातुरी नंद ने कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है तब से किसान परेशान है। कभी पंजीयन के लिए कभी खाद के लिए तो फिर कभी धान का भुगतान के लिए किसान भाजपा सरकार में भटकने को मजबूर है।

शून्य काल में उठाया बिला नाला जलाशय

विधायक चातुरी नंद ने बसना विकासखंड के ग्राम बुटी पाली के बिला नाला जलाशय के डुबान क्षेत्र के प्रभावितों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा विधानसभा में शून्य काल के जरिए उठाया। विधायक चातुरी नंद ने अपने शून्य काल सूचना में कहा कि ग्राम बूटी पाली, तहसील बसना के रा. नि.मंडल सागरपाली पटवारी हल्का नंबर 9 स्थित नीजि भूमि कुल कृषक संख्या 16 कुल ज०नं० 28 कुल रकबा 12.920 हे0 में से प्रभावित भूमि रकबा 7.500 हे० असिथित कृषि भूमि बिला नाला जलाशय योजना के डुबान क्षेत्र में आया है। गाईड लाईन वर्ष 2019-20 के बाजार मूल्य मार्गदर्शी सिध्दान्त मूल्याकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित अनुसार अर्जित की जा रही भूमि का बाजार मूल्य 4,34,500.00 रूपये, असिंचित कृषि भूमि प्रति हे० की दर से तथा 234 रूपये प्रति वर्गमीटर की दर से अर्जित भूमि कुल रकबा 7,500 हे0 का मुआवजा राशि 1,69,09,175.00 रूपये (एक करोड उनहत्तर लाख नौ हजार एक सौ पचहत्त रूपये मात्र) होता है। प्रभावित किसान लगातार मुआवजे की मांग को लेकर कभी जल संसाधन विभाग तो कभी कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने मजबूर है।

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