छत्तीसगढ़

तेंदूपत्ता संग्रहण में तेज रफ्तार, कोंडागांव में प्रशासन की सख्त निगरानी से बदला कामकाज का चेहरा

 कोंडागांव :  केशकाल वन मंडल में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र में पहुंचकर व्यापक निरीक्षण किया। विभिन्न समितियों और संग्रहण फड़ों का गहन परीक्षण किया गया, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा हो सकी।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर, हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की पहल
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संग्रहित तेंदूपत्ते की गुणवत्ता, गड्डियों की संख्या और संग्रहण की गति का विस्तार से मूल्यांकन किया। इस दौरान संबंधित कर्मचारियों और प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर पारदर्शिता में कमी नहीं आनी चाहिए और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।

लक्ष्य के करीब पहुंचता संग्रहण, आंकड़ों में दिखी प्रगति की तस्वीर
वन मंडल को इस सीजन में कुल 28,500 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य दिया गया है। इसके मुकाबले अब तक 8,657 बोरा की खरीदी पूरी हो चुकी है। यह आंकड़ा यह संकेत देता है कि संग्रहण कार्य लगातार गति पकड़ रहा है और तय लक्ष्य की ओर प्रगति जारी है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली से बढ़ा भरोसा, हितग्राहियों को मिल रही सुविधा
संग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए भुगतान व्यवस्था को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है। इससे हितग्राहियों को समय पर भुगतान मिल रहा है और व्यवस्था में विश्वास भी मजबूत हो रहा है।

फड़ों और प्रबंधन की समीक्षा, व्यवस्थागत सुधार पर जोर
निरीक्षण के दौरान फड़ मुंशियों और प्रबंधकों के साथ व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। संग्रहण केंद्रों पर कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने, रिकॉर्ड संधारण और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम
तेंदूपत्ता संग्रहण को ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया को और प्रभावी बनाकर वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भविष्य की तैयारी, लक्ष्य समय पर पूरा करने के लिए तेज होगी प्रक्रिया
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में संग्रहण कार्य की गति और बढ़ाई जाएगी, ताकि तय लक्ष्य को समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सके। इससे न सिर्फ राजस्व बढ़ेगा बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।

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