छत्तीसगढ़

जीवन में प्रभु की भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है : युवराज स्वामी रामकृष्णाचार्य

0 सत्संग, संकीर्तन, पूजा, कथा, नाप जप यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व।

0 नैला के अग्रसेन भवन में 3 अगस्त से 7 अगस्त तक चलेगा झूलनोत्सव।

जांजगीर – चांपा। कलयुग में भी भक्ति के कई मार्ग हैं जिससे भगवत कृपा होगी और भक्त को श्री चरण में स्थान मिल जाएगा, जीवन में प्रभु की भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है उक्त बातें नैला के अग्रसेन भवन में झूलनोत्सव में पधारे युवराज स्वामी रामकृष्णाचार्य महाराज ने 4 अगस्त को पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। 3 अगस्त से 7 अगस्त तक चलने वाली झूलनोत्सव के द्वितीय दिवस अग्रसेन भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि व्यासपीठ में महिलाओं का बैठकर कथा वेद में निषेध बताया गया है, महिलाएं भक्ति भाव से आपस में बैठकर सत्संग, संकीर्तन, भजन ,पूजन वो भगवान की कथा वाचन कर सकती है, लेकिन व्यासपीठ में निषेध है। युवराज स्वामी जी ने आगे बताया कि शास्त्रानुसार व्यास पीठ पर ब्राह्मणों को ही बैठकर कथा कहने का अधिकार है अन्य वर्ण के लोग भी को व्यासपीठ पर आसीन होकर भगवान की कथा निषेध है ,,श्री रामकृष्णाचार्य ने शबरी की तरह भक्ति करने की बात कही, जिसमें दृढ़ विश्वास था, भक्ति प्रगाढ़ था, भगवान राम के आने का लंबे समय से इंतजार की और भक्ति की शक्ति से शबरी को राम मिले। इस झूलनोत्सव अवसर पर उन्होंने सावन महीने में भगवान को आनंदित होकर झुला झुलाने को भक्त और भगवान की प्रेम भक्ति उदाहरण बताया, जिसमें निस्वार्थ आनंद से आनंद पाने और अपने प्रभु को आनंदित करने झूलनोत्सव के महत्व कों बड़ी संजीदगी से समझाया।
और सावन में होने वाले झूलनोत्सव का आनंद लेने और लोगों को प्रेरित करने कहा।

झूलनोत्सव से भक्तों को हो रही आनंद की अनुभूति

झूलनोत्सव को लेकर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, अग्रसेन भवन नैला में 3 अगस्त से आयोजित झूलनोत्सव में भवन को विशेष रूप से सजाया गया है, साज सज्जे से विभूषित झूला में भगवान श्रीकृष्ण को बिठाकर झूला झूलाकर भक्तगण को विशेष आनंद की अनुभूति हो रही है, पूजा, संकीर्तन, भजन और झूलनोत्सव से नैला में भक्ति का वातावरण है, अग्रसेन भवन में रात 8 बजे तक चलने वाले इस झूला उत्सव में भक्तगण काफी उत्साहित नजर आते हैं।

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