बचेली सतनाम भवन में धूमधाम से मनाया गया गुरु बालक दास जी का 220वां जन्मोत्सव

सतनाम चौका मंगल भजन से गूँजा समारोह, ढालसिंह सतनामी ने बताया गुरु बालक दास जी का पराक्रम और समाज सेवा का इतिहास

दुर्जन सिंह
बचेली। स्थानीय सतनाम भवन बचेली में सतनाम समाज के संस्थापक परमपूज्य गुरु घासीदास जी के उत्तराधिकारी और महान संत राजा गुरु बालक दास जी का 220वां जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत गुरु घासीदास जी, गुरु बालक दास जी एवं जैतखाम के प्रति आरती, वंदना और माल्यार्पण कर की गई। इसके उपरांत स्वेत पटाका आरोहण किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा।

इस अवसर पर जिला दुर्ग से आए ढालसिंह सतनामी एवं उनके साथियों ने अत्यंत मधुर और मनमोहक सतनाम चौका मंगल भजन की प्रस्तुति दी। भजन के दौरान ढालसिंह ने अपने संबोधन में गुरु बालक दास जी के पराक्रम, राजकीय व्यवस्था और प्रजा के प्रति उनके समर्पण को विस्तार से बताया।इतिहास साक्षी है कि 1828 में कर्नल इग्नू ने उनके राज प्रबंधन, न्यायप्रियता और प्रजा-हितैषी कार्यों को देखकर उन्हें राजा और गुरु दोनों की उपाधि प्रदान की थी। गुरु बालक दास जी ने सतनाम पंथ के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर रावटी लगाई और समाज को संगठित किया।कहा जाता है कि यदि गुरु बालक दास जी पाँच वर्ष और जीवित रहते तो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश का अधिकांश भाग सतनाम पंथ से आलोकित हो जाता। किंतु दुर्भाग्यवश, 1860 में उनके दुश्मनों ने छलपूर्वक उनकी निर्मम हत्या कर दी। इसके बावजूद आज भी उनकी शिक्षाएँ और त्याग समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।

इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज की महिलाओं, वरिष्ठ मार्गदर्शकों एवं युवा सदस्यों ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, अनुशासन और समाजिक एकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।