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Hariyali Amavasya : हरियाली अमावस्या कब है, जानिए महत्व और उपाय

हरियाली अमावस्या सावन मास में आती है और यह तिथि पितरों की पूजा, दान-पुण्य और पवित्र स्नान के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन कई शुभ योग का संयोग बन रहा हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में आइये जानते हैं हरियाली अमावस्या कब मनाई जाएगी। साथ ही जानिए इसकी सही तिथि, महत्व और उपाय।
रियाली अमावस्या सावन मास की महत्वपूर्ण तिथि है जिसे सावन अमावस्या भी कहा जाता है। यह सावन की शिवरात्रि के अगले दिन आती है। और नवग्रह शांति और पितरों के पूजन के लिए अहम मानी जाती है। इस बार सावन मास में हरियाली अमावस्या कब मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है, यह भी जानिए।

हरियाली अमावस्या का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि यानी हरियाली अमावस्या की तिथि 24 जुलाई को सुबह 2.29 बजे शुरू होगी और 25 जुलाई को रात 12.41 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी। हरियाली अमावस्या पितरों के पूजा, दान-पुण्य और पवित्र नदी में स्नान करने और ध्यान आदि के लिए शुभ मानी जाती है। हरियाली अमावस्या पर गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं।

हरियाली अमावस्या का महत्व
सावन मास में चारों तरफ हरियाली होती है। बारिश की वजह से मौसम सुहाना होता है और पेड़-पौधों में अलग चमक दिखाई देती है। इस हरे-भरे वातावरण के चलते सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हरियाली अमावस्या के मौके पर पितर पूजा और नवग्रह शांति पूजा कराने का भी महत्व है। इसके साथ ही शिव पूजन का बड़ा महत्व माना जाता है। इसके साथ ही पौधे लगाने का महत्व है। इस दिन आम, आंवला, नीम, बरगद, पीपल आदि के पौधे लगाने का बड़ा महत्व है।
हरियाली अमावस्या के उपाय
हरियाली अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए या नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लेना चाहिए।
स्नान के बाद ध्यान आदि करना चाहिए और अपने ईष्ट का ध्यान करना चाहिए। शिव पूजन का भी महत्व है। शिवजी को आक, मदार आदि का फूल चढ़ा सकते हैं।

पितरों के निमित्त पूजन करना चाहिए। जरूरमंदों को भोजन कराना चाहिए।
पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और फलदार पौधे लगाने चाहिए। घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीया जलाना चाहिए।

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