विपत्ति आने से सबकुछ विपरीत हो जाता- पंडित अविनाश महाराज

श्री राधाकृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस
भानुप्रतापपुर। जन्माष्टमी महामहोत्सव के पावन अवसर पर श्री राधा कृष्ण मंदिर में संगीतमय श्रीमद्भागवत भागवत कथा के तीसरे दिवस शुक्रवार को ब्यासपीठ पर विराजमान पंडित अविनाश जी महाराज ने ध्रुव चरित्र, सती चरित्र, प्रहलाद चरित्र एवं अजामिल ब्याख्यान की कथा सुनाई।

महाराज जी ने कहा कि विश्व पटल पर भारत देश सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भारत एकमात्र देश है जिसे भारत माता का दर्जा मिला हुआ है। वही राज्यो की तुलना छत्तीसगढ़ प्रदेश व संभाग में बस्तर को श्रेष्ठ माना गया है।
श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिला था कि सातवे दिवस ही उनकी मृत्यु हो जाएगी। वैसे ही जीवन आपका औऱ हमार है न जाने जीवन की वो आखिर सात दिवस कब आ जाये। जीवन का कोई भरोसा नही है। 2020 से 2028 तक का समय कष्टमय बताया गया है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कर राजा परीक्षित ने अपने जीवन मृत्यु को सुंदर बनाया है। वैसे ही आप भी श्रीमद्भागवत कथा व भक्ति से अपने जीवन मृत्यु को सुंदर बनाए।
विपत्ति आने से सबकुछ विपरीत हो जाता है। जब तक गंगा, गौ एवं गीता सुरक्षित है तब तक सृष्टि रहेगी।
इस कलियुग में हरिनाम ही एक मात्र साधन है मोक्ष प्राप्ति का इसलिए समय रहते अपने आप को ईश्वर की भक्ति में लगा लीजिए।
भगवान की भक्ति के चार प्रमुख मार्ग बताये है। जिनमे पहला आसान, दूसरा श्वास, तीसरा संगत एवं चौथा इंद्रिया है यदि इसे बस में कर ले तो ईश्वर को आया जा सकता है।
भगवान के प्रति भक्ति के कई उदाहरण है। श्री सूरदास जी महाराज, भक्त प्रहलाद, भक्त ध्रुव
महाराज जी ने बताया कि भक्त प्रहलाद, भक्त ध्रुव बालकाल्य में ही ईश्वर को प्राप्त कर लिया था।
विवेकानंद नंद ने कहा था कि देश मे लोग एक दूसरे के पैर खिंचने में लगे हुए है,नही तो भारत कब से विश्व गुरु बन जाती।
अविनाश महाराज ने बताया कि वर्तमान में भक्तो का देवी देवताओं के दर्शन करने का स्वरूप भी बदल गया है। तो ईश्वर की कृपा कैसे मिलेगी। आज हर ब्यक्ति शोक दुख रूपी सागर में डूबा हुआ है। इस सागर से प्रभु ही निकाल सकता है। वही कर्म को भी प्रधानता बताया गया है। लोग अपने अपने कर्म के अनुसार फल प्राप्त करते है। इनके अलावा श्रीमद्भागवत के कई कथा विस्तार से बताया गया है।