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Operation Sindoor चर्चा के दौरान राहुल का सरकार पर तीखा हमला

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की। राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने पीएम मोदी से कई सवाल पूछे।

राहुल गांधी ने कहा कि मैंने राजनाथ सिंह का भाषण सुना कि उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर सुबह 1.05 बजे शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 22 मिनट तक चला। फिर उन्होंने सबसे चौंकाने वाली बात कही-1.35 बजे हमने पाकिस्तान को फोन करके बताया कि हमने असैन्य ठिकानों पर हमला किया है और हम तनाव नहीं बढ़ाना चाहते…शायद उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने क्या खुलासा किया है…”।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि दो शब्द हैं- ‘पॉलिटिकल विल’ और ‘फ्रीडम ऑफ ऑपरेशन’। अगर आप भारतीय सशस्त्र बलों का प्रयोग करना चाहते हैं, तो आपके पास 100% पॉलिटिकल विल होनी चाहिए और आपको पूरी तरह से फ्रीडम ऑफ ऑपरेशन देना पड़ेगा…”।

ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ बल्कि शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने, सभी दलों ने यह प्रतिबद्धता जताई कि हम सेना और भारत की निर्वाचित सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। हमने उनके कुछ नेताओं की ओर से कुछ व्यंग्यात्मक टिप्पणियां सुनीं लेकिन हमने कुछ नहीं कहा। यह एक ऐसी बात थी जिस पर INDIA गठबंधन के सभी वरिष्ठ नेतृत्व सहमत थे। हमें बहुत गर्व है कि एक विपक्ष के रूप में हम एकजुट रहे, जैसा कि हमें होना चाहिए था।”

ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “एक क्रूर हमला (पहलगाम), निर्दयी हमला जो स्पष्ट रूप से पाकिस्तानी सरकार द्वारा आयोजित और षडयंत्र किया गया था। युवा और वृद्ध लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। हम सभी ने, इस सदन के प्रत्येक व्यक्ति ने मिलकर पाकिस्तान की निंदा की है।

राहुल गांधी ने कहा कि जब भी मैं सेना के किसी व्यक्ति से मिलता हूं और हाथ मिलाता हूं तो मुझे पता लग जाता है कि ये टाइगर है, इसको हिलाया नहीं जा सकता। ये देश के लिए मर-मिटने को तैयार है। टाइगर को आप बांध नहीं सकते हैं, अगर आपको उनसे सच्चा काम लेना है, तो आपको पूरी छूट देनी होगी।

पहलगाम आतंकी घटना होने के बाद मैं करनाल में नरवाल जी के घर गया। उनके बेटे नेवी में थे और वो CRPF में थे। मुझे ऐसा लगा कि मैं अपने परिवार के साथ बैठा हूं। उन्होंने अपने बेटे का फोटो एल्बम दिखाया, उसके बारे में बताया कि वो बहुत हंसी-मजाक करता था। बहन ने कहा- मैं दरवाजे की ओर देखती हूं, लेकिन मेरा भाई नहीं आता है और कभी नहीं आएगा। उसके बाद मैं यूपी में एक और परिवार से मिला, जिसमें पति को पत्नी के सामने गोली मार दी गई थी। ये देखकर हर हिंदुस्तानी को दर्द होता है, दुख होता है। जो हुआ, बहुत गलत हुआ।

राहुल गांधी ने कहा कि राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में 1971 और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तुलना की। मैं उनको याद दिलाना चाहता हूं कि 1971 में Political will थी। अमेरिका का सातवां बेड़ा आ रहा था, लेकिन उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने कहा- हमें बांग्लादेश में जो करना है, हम करेंगे। जनरल मानेकशॉ ने इंदिरा गांधी जी से कहा मैं अभी ऑपरेशन नहीं करूंगा, मुझे 6 महीने चाहिए। इंदिरा जी ने उन्हें ऐसा करने की पूरी स्वतंत्रता दी। इंदिरा जी ने कहा- आपको जितना भी समय चाहिए, आप लीजिए। आपके पास फ्रीडम ऑफ एक्शन होना चाहिए। इसी के बाद एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों ने सरेंडर किया और एक नया देश बना।

एक नया शब्द चला है- ‘New Normal’। विदेश मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सभी देशों ने आतंकवाद की निंदा की। ये सच है कि कई देशों ने आतंकवाद की निंदा की, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि पहलगाम के बाद एक भी देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की। इसका मतलब है कि दुनिया, भारत को पाकिस्तान के साथ खड़ा कर रही है। जबकि UPA सरकार के समय आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पूरी दुनिया पाकिस्तान की निंदा करती थी।

पाकिस्तान की सरकार को क्यों कहा गया कि न हम आपके आर्मी इंफ्रास्ट्रक्चर को अटैक करेंगे, न ही एयर डिफेंस को अटैक करेंगे। हम आगे जंग नहीं चाहते। मतलब पाकिस्तान से कहा गया कि हमने तुम्हें एक थप्पड़ मारा है, लेकिन दूसरा थप्पड़ नहीं मारेंगे? आखिर क्यों? क्योंकि इस पूरे एक्शन का मकसद था कि नरेंद्र मोदी की छवि बचाई जाए।

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