छत्तीसगढ़

बचेली में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई सतगुरु घासीदास जयंती

गुरु पर्व समारोह में पंथी नृत्य, आरती व ध्वजारोहण ने रचा आध्यात्मिक माहौल

सतनाम भवन में आयोजित 41वें वर्ष का गुरु घासीदास जयंती समारोह, समाजजनों की रही उल्लेखनीय सहभागिता

दुर्जन सिंह

बचेली। नगर के सतनाम भवन, बचेली में 18 दिसंबर 2025, गुरुवार को सतगुरु घासीदास जयंती (गुरु पर्व) के अवसर पर 41वें वर्ष भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सतनामी समाज, बचेली के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन, बुजुर्ग, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनएमडीसी परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक श्रीधर कोडारी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बचेली वन परिक्षेत्र अधिकारी आशुतोष मांडवा ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य महाप्रबंधक उत्पादन टी शिवकुमार, पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल, मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक महेश नायर मौजूद रहे।

समारोह का शुभारंभ सतगुरु घासीदास जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। तत्पश्चात जैतखाम पर ध्वजारोहण कर गुरु-शिष्य परंपरा को नमन किया गया।

अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने सतगुरु घासीदास जी की अमर वाणी “मनखे-मनखे एक समान” का उल्लेख करते हुए समाज में समता, मानवता और भाईचारे को आत्मसात करने का संदेश दिया। वक्ताओं ने गुरु घासीदास जी के विचारों को आज के सामाजिक जीवन में अत्यंत प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही रायपुर (चीचा) से आए ‘उगता सूरज लोक नृत्य दल’ द्वारा प्रस्तुत पंथी नृत्य। नृत्य के दौरान प्रस्तुत झांकियाँ, मीनार निर्माण एवं पारंपरिक भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा सतनाम भवन तालियों से गूंज उठा।

समारोह के दौरान समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को श्रीफल, साल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं एवं बच्चों की सक्रिय सहभागिता रही। सतनामी समाज बचेली के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरा आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक एकता का प्रतीक बना, जिसने सतगुरु घासीदास जी के विचारों को एक बार फिर जनमानस में जीवंत कर दिया।

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