छत्तीसगढ़

बचेली में तेलुगु समाज ने धूमधाम से मनाया श्री सीताराम कल्याणम, राम नवमी पर गूंजे वेद मंत्र

9 वर्षों से निरंतर आयोजन, क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि के लिए हुआ भव्य धार्मिक कार्यक्रम

दुर्जन सिंह

बचेली। आंध्र कल्चरल एसोसिएशन, बचेली द्वारा राम नवमी के पावन अवसर 27 मार्च, शुक्रवार को श्री सीताराम कल्याणम का भव्य आयोजन हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ किया गया। तेलुगु समाज द्वारा पिछले 9 वर्षों से निरंतर इस आयोजन का संचालन क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और लोककल्याण की भावना से किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत 26 मार्च की शाम को हुई, जब ईश्वर राव द्वारा निर्मित भगवान श्रीराम की बाल स्वरूप मूर्ति को उनके निवास से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। इस यात्रा में तेलुगु समाज के महिला एवं पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए श्रीराम मंदिर पहुंची, जहां पहले से स्थापित श्री सीता, राम, लक्ष्मण एवं हनुमान जी की उत्सव मूर्तियों के साथ सभी मूर्तियों को आंध्र कल्चरल एसोसिएशन परिसर में विधिवत स्थापित किया गया।

27 मार्च को प्रातः 8 बजे से आंध्र प्रदेश के काकीनाडा से पधारे वेद पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री सीताराम कल्याणम संपन्न कराया गया। इस पावन अवसर पर बचेली परियोजना प्रमुख श्रीधर कोडारी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी कोडारी, किरंदुल परियोजना प्रमुख रविंद्र नारायण एवं उनकी धर्मपत्नी, बचेली परियोजना के उत्पादन महाप्रबंधक टी शिवा कुमार सहित नगर के अनेक दंपत्तियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना में सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम में बचेली के साथ-साथ किरंदुल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और धार्मिक अनुष्ठान का लाभ लिया। पूजा के उपरांत भद्राचलम से आए रसोइयों द्वारा तैयार पारंपरिक तेलुगु व्यंजनों का भंडारा श्रद्धालुओं को परोसा गया, जिसका सभी ने आनंद लिया।

संध्या समय में श्री सीता, राम, लक्ष्मण एवं हनुमान जी की उत्सव मूर्तियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें गाजे-बाजे, कोलाटम नृत्य एवं काली नृत्य झांकी ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। नगर भ्रमण के पश्चात मूर्तियों को पुनः श्रीराम मंदिर में स्थापित किया गया।

इस पूरे आयोजन की तैयारी तेलुगु समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा लगभग एक माह पूर्व से ही की जा रही थी। इससे पूर्व तेलुगु नववर्ष उगादी के अवसर पर भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। समिति हर वर्ष तेलुगु भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार हेतु इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है।

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