छत्तीसगढ़

आंध्र भवन बचेली में उगादी पर्व धूमधाम से संपन्न, तेलुगू समाज ने परंपराओं के साथ मनाया नववर्ष

परंपरागत रीति-रिवाज, उगादी पचड़ी और सांस्कृतिक उल्लास के बीच गूंजा नववर्ष का संदेश — समाज में दिखी एकता और उत्साह की झलक

दुर्जन सिंह
बचेली। दंतेवाड़ा जिले के बचेली स्थित आंध्र भवन में तेलुगू समाज द्वारा उगादी पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे समाज में नववर्ष के स्वागत का उल्लास देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और मंगलाचार से हुई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर नए वर्ष के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में पंडित जी द्वारा 12 राशियों का विस्तृत वार्षिक भविष्यफल बताया गया। उपस्थित लोगों ने पूरे मनोयोग से अपने-अपने राशियों के अनुसार आने वाले वर्ष की संभावनाओं, सफलता और चुनौतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी रोचक और ज्ञानवर्धक बन गया।


इस आयोजन में एनएमडीसी बचेली के इलेक्ट्रिकल विभाग के डीजीएम श्री डी.पी. शेट्टी अपनी धर्मपत्नी के साथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। नगर पालिका सीएमओ पीटीएम कृष्णा राव, तेजस्विनी महिला समिति के अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी श्रीधर कोडारी विशिष्ट पद्धति के रूप में मौजूद रहे। उनके आगमन पर आयोजकों द्वारा पुष्पगुच्छ एवं पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में तेलुगू समाज को उगादी की शुभकामनाएं देते हुए समाज की एकता और संस्कृति के संरक्षण की सराहना की।
उगादी पर्व के अवसर पर विशेष रूप से पारंपरिक व्यंजनों का भी आयोजन किया गया, जिसमें ‘उगादी पचड़ी’ प्रमुख रहा। यह व्यंजन जीवन के विभिन्न रसों — मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा और नमकीन — का प्रतीक होता है, जो जीवन में आने वाले सुख-दुख को दर्शाता है। इसके अलावा अन्य दक्षिण भारतीय पकवानों का भी सभी ने आनंद लिया।
कार्यक्रम में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की, वहीं बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लेकर माहौल को जीवंत बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान संगीत, आपसी मेलजोल और खुशियों का माहौल बना रहा।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। इस तरह उगादी पर्व ने न केवल नववर्ष का स्वागत किया, बल्कि समाज में एकता, संस्कृति और परंपराओं को भी मजबूती प्रदान की।

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