संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

बचेली में विभिन्न स्थानों पर शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा, कथा वाचन और प्रसाद वितरण

दुर्जन सिंह
बचेली। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाए जाने वाले हलषष्ठी (कमरछठ) पर्व को बुधवार 14 अगस्त को लौह नगरी बचेली में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की और सगरी की स्थापना कर कथा वाचन किया।
नगर के गायत्री सत्संग भवन परिसर, एफओएच कॉलोनी (कुंदेश्वर महादेव समिति), गुरुघासीदास चौक टाइप वन गणेश मंडप, बैंक कॉलोनी, पुलिस थाना कॉलोनी सहित कई स्थानों पर महिलाएं एकत्र होकर सामूहिक रूप से पूजा में शामिल हुईं। परंपरा के अनुसार, गड्ढे बनाकर उसमें भैंस के दूध से बने घी और दही डालकर पूजा की गई। इस दौरान पसहर चावल का सेवन किया गया और छह प्रकार के जानवरों को प्रसाद अर्पित किया गया।

व्रतधारी महिलाओं ने शिव-पार्वती से जुड़ी धार्मिक कथाएं सुनीं और पूजा के दौरान बिना हल चले उगे अन्न का ही उपयोग किया। चूंकि नगर में तालाब नहीं हैं, इसलिए परंपरागत तालाब पूजा के स्थान पर गड्ढों में अनुष्ठान संपन्न हुआ। हलषष्ठी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जिसे हर वर्ग और जाति के लोग सद्भावपूर्वक मनाते हैं। इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन वर्जित है, जबकि भैंस के दूध से बने प्रसाद का विशेष महत्व है। मान्यता है कि विधि-विधान से यह व्रत करने पर संतान की दीर्घायु और आरोग्य मिलता है।