छत्तीसगढ़

साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़, रिटायर्ड अफसर से 37 लाख की ठगी करने वाले 5 आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गैंग ने खुद को पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड विद्युत विभाग अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया और करीब 37 लाख रुपये की ठगी कर ली।

फर्जी अफसर बनकर दिया मनी लॉन्ड्रिंग का डर, दबाव में ट्रांसफर कराए पैसे

पीड़ित नरेन्द्र ठाकुर, जो विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त हैं, उन्हें 14 जनवरी 2026 को एक अज्ञात कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को TRAI से जुड़ा अधिकारी बताया और उनके नाम पर फर्जी मोबाइल नंबर इस्तेमाल होने की बात कही। इसके बाद मामला “मनी लॉन्ड्रिंग” में फंसाने की धमकी तक पहुंच गया।इसके बाद एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच करीब 36.97 लाख रुपये अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।

राजस्थान तक पहुंची जांच, एक बैंक कर्मचारी से खुला पूरा नेटवर्क

शिकायत के बाद रायगढ़ साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की और बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेस करते हुए भीलवाड़ा राजस्थान तक पहुंच बनाई। यहां से बंधन बैंक के कर्मचारी राहुल व्यास को हिरासत में लिया गया, जिसकी पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।इसके बाद पुलिस ने रविराज सिंह, आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास को भी अलग अलग जगहों से गिरफ्तार किया।

गैंग का मास्टर प्लान, वेबसाइट और तकनीक से सीखी ठगी की तरकीब

जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्य पहले से आपस में जुड़े हुए थे और ऑनलाइन माध्यम से साइबर ठगी की तकनीक सीख चुके थे। धीरे धीरे इन्होंने इसे कमाई का जरिया बना लिया।आरोपियों ने स्वीकार किया कि ठगी से मिलने वाली रकम का तय प्रतिशत में बंटवारा होता था, जिसमें अलग अलग सदस्यों को 2 से 5 प्रतिशत तक हिस्सा मिलता था।

देशभर में 1.40 करोड़ की ठगी का खुलासा, कई बैंक खाते सीज

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह ने देशभर में करीब 1.40 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की है। आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं और उनके पास से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कई राज्यों में फैला नेटवर्क

रायगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई से यह साफ हुआ है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और डिजिटल तकनीक का गलत इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहा था। फिलहाल पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

साइबर ठगी को लेकर बढ़ी सतर्कता की जरूरत

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर ठगी के नए तरीके लगातार बढ़ रहे हैं और आम लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” जैसे झूठे डर से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।

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