चलती कार पर गिरी मौत जैसी डाल…एक चूक और टल गया बड़ा हादसा

खैरागढ़ : डोंगरगढ़ मुख्य मार्ग पर शुक्रवार रात एक ऐसा हादसा सामने आया, जिसने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। अमलीडीह खुर्द के पास अचानक एक विशाल पेड़ की डाल चलती कार पर आ गिरी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि चालक बाल बाल बच गया। बताया जा रहा है कि घटना रात करीब 8:30 बजे की है, और यदि समय में जरा सा भी अंतर होता तो परिणाम बेहद भयावह हो सकता था।
ओवरलोड ट्रक की टक्कर बनी हादसे की वजह
मिली जानकारी के अनुसार, स्विफ्ट डिजायर क्रमांक CG 07 BC 8100 को चला रहे पटवारी दिव्यांश राजपूत अकेले डोंगरगढ़ से खैरागढ़ की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे पुराने टायरों से लदे ओवरलोड ट्रक ने सड़क किनारे झुकी एक बड़ी पेड़ की डाल को जोर से टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर के बाद वह भारी डाल सीधे पीछे आ रही कार पर गिर पड़ी, जिससे कार का पिछला हिस्सा बुरी तरह चकनाचूर हो गया।
चश्मदीदों की चेतावनी: पीछे कोई होता तो जान नहीं बचती
घटना को देखने वाले लोगों का कहना है कि डाल इतनी भारी थी कि अगर कार की पिछली सीट पर कोई बैठा होता तो उसकी जान बचना मुश्किल था। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। सूचना मिलते ही खैरागढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की सहायता से सड़क से पेड़ की डाल हटाकर यातायात बहाल किया गया। क्षतिग्रस्त वाहन और ट्रक को थाने ले जाकर जांच शुरू कर दी गई है।
लंबे समय से खतरा बने पेड़, अब उठ रहे जिम्मेदारी के सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे मौजूद यह पेड़ लंबे समय से झुका हुआ था और खतरा बना हुआ था। कई बार संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन हर बार अनदेखी की गई। नतीजा अब इस हादसे के रूप में सामने आया है।
लोगों की मांग: हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
खैरागढ़ से डोंगरगढ़ और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग रोजाना हजारों वाहनों का दबाव झेलता है। इसके बावजूद सड़क किनारे सूखी डालियां, झुके पेड़ और अन्य जोखिम लंबे समय से बने हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सिर्फ घटनाओं के बाद दिखावे की कार्रवाई करने के बजाय पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही सूखे और खतरनाक पेड़ों की तत्काल छंटाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से लोगों की जान जोखिम में न पड़े।




