CGPSC परीक्षा पर उठा बड़ा सवाल, एक हफ्ते में रिजल्ट जारी होने से भड़के अभ्यर्थी, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC की मुख्य परीक्षा 2026 का परिणाम महज एक सप्ताह के भीतर जारी होने के बाद अब पूरी चयन प्रक्रिया विवादों में घिरती नजर आ रही है। अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की अगली सुनवाई अब 5 अगस्त 2026 को होगी।
इतनी जल्दी रिजल्ट जारी होने पर उठे सवाल
19 अप्रैल 2026 को आयोजित पीएससी मुख्य परीक्षा का परिणाम आयोग ने बेहद कम समय में जारी कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इतनी कम अवधि में कॉपियों का निष्पक्ष मूल्यांकन संभव नहीं है। इसी वजह से चयन प्रक्रिया को लेकर संदेह गहराता जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग से लगातार शिकायत की गई, लेकिन उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी मांगी गई, लेकिन वहां से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
हाईकोर्ट में आयोग नहीं दे पाया ठोस जवाब
जानकारी नहीं मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान भी आयोग की ओर से कोई स्पष्ट और ठोस जवाब पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई करीब तीन महीने बाद तय कर दी।
कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की वेकेशन बेंच में पक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि CGPSC द्वारा आयोजित कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 की चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
अभ्यर्थियों ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला
पीड़ित अभ्यर्थियों का कहना है कि यह सिर्फ एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उनका आरोप है कि यदि पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं तो पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।




