छत्तीसगढ़ में मौसम का यू-टर्न: कहीं आंधी-बारिश तो कहीं झुलसाती गर्मी, अगले 5 दिन अहम

छत्तीसगढ़ : मौसम इन दिनों दो अलग-अलग रंग दिखा रहा है। एक तरफ कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश राहत दे रही है, तो दूसरी ओर कुछ इलाकों में सूरज की तीखी तपिश लोगों को बेहाल कर रही है। भारतीय मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले 5 दिनों तक प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदलता रहेगा।
गर्मी का प्रहार भी जारी: राजनांदगांव बना सबसे गर्म जिला
रविवार 10 मई 2026 को राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजधानी रायपुर के लालपुर क्षेत्र में 39.1 डिग्री, बिलासपुर में 38.4 डिग्री और दुर्ग में 38.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।
वहीं पेंड्रा रोड, अंबिकापुर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन गर्मी का असर वहां भी महसूस किया गया। न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 19.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार सरगुजा, जशपुर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिससे मौसम अचानक बदल सकता है।
यलो अलर्ट जारी: कई संभागों में बदलेगा मौसम का मिजाज
सरगुजा, रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के अधिकांश जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। आंधी और बारिश के असर से कुछ क्षेत्रों में तापमान में करीब 4 डिग्री तक गिरावट देखने को मिल सकती है।
इसके विपरीत, जहां बारिश का असर कम रहेगा वहां तापमान धीरे-धीरे 5 डिग्री तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी और तेज होने के संकेत हैं।
मौसम में बदलाव की असली वजह क्या है
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के आसपास बना चक्रवाती परिसंचरण इस बदलाव की बड़ी वजह है। यह सिस्टम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर तक बताई जा रही है। इसी प्रभाव से प्रदेश में बड़े पैमाने पर मौसम का मिजाज बदल रहा है।
लोगों के लिए संकेत: राहत भी, सतर्कता भी जरूरी
आने वाले दिनों में जहां कुछ जिलों में गर्मी से राहत मिल सकती है, वहीं तेज आंधी और बारिश के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी होगा। मौसम का यह बदला हुआ रुख किसानों और आम लोगों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।




