इंदौर में प्रधान आरक्षक की 64 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा, लोकायुक्त ने इंदौर और देवास में मारे छापे

मध्य प्रदेश : इंदौर में लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान पुलिस विभाग में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक से जुड़ी कथित बेनामी संपत्तियों का बड़ा मामला सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रधान आरक्षक फिरोज खान, उनके परिजनों, सहयोगियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर 46 अचल संपत्तियों का पता चला है। इन संपत्तियों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 64.01 करोड़ रुपये बताई गई है। लोकायुक्त की टीम ने इस मामले में 14 अक्टूबर को इंदौर और देवास में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।
शिकायत के बाद लोकायुक्त ने शुरू की जांच
लोकायुक्त के पुलिस उपाधीक्षक सुनील तालान के अनुसार, इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) में चालक के पद पर तैनात प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वह लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। साथ ही, पुलिस विभाग में पदस्थ होने का कथित प्रभाव दिखाकर विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में भी शामिल हैं।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लोकायुक्त ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के आधार पर फिरोज खान और उनकी सहयोगी रोशनी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
14 अक्टूबर को इंदौर और देवास में छापेमारी
जांच के सिलसिले में लोकायुक्त की टीम ने 14 अक्टूबर को इंदौर और देवास में एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान प्रधान आरक्षक से जुड़ी कंपनियों, उनके परिजनों और सहयोगियों के ठिकानों की तलाशी ली गई।
छापेमारी के दौरान संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की जांच की गई। इसी प्रक्रिया में अलग-अलग व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर दर्ज 46 अचल संपत्तियों का पता चला। लोकायुक्त अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के स्रोत और संबंधित लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
सरकारी दर पर 17.19 करोड़, बाजार मूल्य 64 करोड़ रुपये से अधिक
लोकायुक्त की जांच में सामने आई 46 अचल संपत्तियों के मूल्यांकन में सरकारी और बाजार दरों के बीच बड़ा अंतर मिला है।
- सरकारी मूल्यांकन: करीब 17.19 करोड़ रुपये।
- अनुमानित बाजार मूल्य: करीब 64.01 करोड़ रुपये।
- संपत्तियों की संख्या: कुल 46 अचल संपत्तियां।
- खरीद पर खर्च: अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, चल और अचल संपत्तियों की खरीद पर करीब 18.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, ये संपत्तियां अलग-अलग लोगों के नाम पर खरीदी गई थीं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और संबंधित लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।
पत्नी की फर्म के नाम पर कृषि भूमि खरीदने की भी जांच
जांच के दौरान प्रधान आरक्षक की पत्नी की फर्म के नाम पर करोड़ों रुपये की कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। लोकायुक्त की टीम इस भूमि से जुड़े दस्तावेजों, लेनदेन और स्वामित्व का सत्यापन कर रही है।
फिलहाल जांच जारी है। एजेंसी की ओर से जुटाए जा रहे दस्तावेजों और वित्तीय जानकारी के आधार पर संपत्तियों के स्रोत तथा मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका का पता लगाया जाएगा।




