छत्तीसगढ़

बचेली में बिखरी केरल की संस्कृति की मनमोहक छटा, उमंग और उल्लास के साथ मनाया गया ओणम पर्व

इंडियन कॉफी हाउस के आयोजन में दिखी मलयाली परंपराओं की जीवंत झलक; गीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों ने बांधा समां

दुर्जन सिंह 

बचेली- एनएमडीसी बचेली परियोजना के गेस्ट हाउस में रविवार को केरल की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का सुंदर संगम देखने को मिला। अवसर था ओणम पर्व के भव्य आयोजन का, जिसका आयोजन इंडियन कॉफी हाउस, बचेली द्वारा किया गया। पिछले करीब 20 वर्षों से मनाए जा रहे इस आयोजन ने एक बार फिर मलयाली समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एनएमडीसी बचेली परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक श्रीधर कोडारी उपस्थित रहे। वहीं उत्पादन विभाग के सीजीएम शिवकुमार, महाप्रबंधक (एचआर) महेश नायर, सौरभ कुमार, राकेश रंजन सहित एनएमडीसी के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बचेली के मलयालम समाज के बड़ी संख्या में सदस्य भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत से ही वातावरण में ओणम की पारंपरिक खुशियां और उत्साह नजर आया। मंच का संचालन मैरी जोसेफ ने प्रभावशाली ढंग से किया और पूरे कार्यक्रम को सहज एवं आकर्षक बनाए रखा।

परंपराओं और संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन

ओणम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, प्रकृति, भाईचारे और सामूहिक उत्सव की भावना का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना को बचेली के आयोजन में भी पूरी आत्मीयता के साथ प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में ओणम से जुड़ी विभिन्न पारंपरिक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को केरल की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

बच्चों, महिलाओं और मलयाली समाज के कलाकारों ने पारंपरिक मलयालम गीतों और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। रंग-बिरंगी वेशभूषा में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। गीत और नृत्य के माध्यम से केरल की लोक-संस्कृति और परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।

पारंपरिक व्यंजनों से सजी ओणम की थाली

कार्यक्रम की खासियत केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं रहीं, बल्कि केरल के पारंपरिक व्यंजनों से सजा भोजन भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। ओणम पर्व की परंपरा के अनुरूप विभिन्न प्रकार के पारंपरिक मलयाली व्यंजन परोसे गए। स्वाद और परंपरा के इस मेल ने आयोजन को और भी खास बना दिया।

आयोजन में शामिल लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक भोजन का आनंद लिया और एक-दूसरे को ओणम की शुभकामनाएं दीं।

दो दशक से कायम है सांस्कृतिक परंपरा

बचेली में करीब दो दशकों से ओणम पर्व का आयोजन किया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और आत्मीयता के साथ जारी है। इस आयोजन ने न केवल मलयाली समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर रखा है, बल्कि बचेली की विविधता में एकता और सामाजिक सौहार्द की भावना को भी मजबूत किया है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विभिन्न समुदायों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं। उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर यह ओणम समारोह देर तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

ओणम केरल का प्रमुख फसल एवं सांस्कृतिक पर्व है, जिसे मुख्य रूप से राजा महाबली के स्वागत और उनकी स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा महाबली के शासनकाल में केरल में सुख-समृद्धि और समानता थी और वे हर वर्ष ओणम पर अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।

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