राज्य स्थापना दिवस पर बचेली में सजी लोक संस्कृति की महफिल, कलाकारों का हुआ सम्मान

‘मया के डोर’ एवं ज्ञान गंगा मानस मंडली का अनूठा आयोजन, लोकगीत-संगीत से गूंजा नगर; प्रतिभावान बच्चों को शैक्षणिक किट एवं खेल सामग्री देकर किया प्रोत्साहित
दुर्जन सिंह
बचेली – छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बैलाडीला की नगरी बचेली में लोककला, संस्कृति और प्रतिभाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। 1 नवंबर को लोक कला मंच ‘मया के डोर’ एवं ज्ञान गंगा मानस मंडली परिवार के संयुक्त तत्वावधान में कलाकार मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं की झलक के साथ कलाकारों की प्रतिभा और सामाजिक एकजुटता का शानदार संदेश देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं राज्यगीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनएमडीसी बचेली परियेाजना के सिविल उपमहाप्रबंधक एसआर डहरिया रहे। वही विशिष्ट व अन्य अतिथियो में पालिका उपाध्यक्ष सतीश प्रेम चंदानी, प्रदेश महिला साहु समाज के संयुक्त सचिव बीना साहु, एसकेएमएस सचिव जागेश्वर प्रसाद, छग सांस्कृतिक समिति के पूर्व अध्यक्ष अमृत लाल यदु, आनंद पांडे, महेन्द्र कुमार साहु, पार्षद हरीश शर्मा, धन सिंह नाग, विलासिनी नाग, मया के डोर के संचालक कुशल साहु व रूकमणि साहु, हिरवानी साहु व अन्य की उपस्थिति रही। एनएमडीसी बचेली के अधिकारी, नगर पालिका परिषद के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, कलाकार एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां-
समारोह में स्थानीय कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत, पारंपरिक संगीत एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। मंच पर कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। पूरे आयोजन में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम की एक विशेष पहल के तहत क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों को शिक्षा एवं खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शैक्षणिक किट और खेल सामग्री प्रदान कर सम्मानित किया गया। स्थानीय दानदाताओं के सहयोग से आयोजित इस पहल ने समारोह को केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा।

तीन दशकों से संस्कृति की पहचान बना रहे बचेली के कलाकार-
इस अवसर पर श्री कुशल साहू एवं हेमंत मंडावी ने अपने संबोधन में कहा कि बचेली के कलाकार पिछले लगभग तीन दशकों से अपनी कला और सांस्कृतिक प्रतिभा के माध्यम से नगर को स्थानीय स्तर से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम में संगीत महाविद्यालय से जुड़े अतिथियों एवं कलाकारों ने भी सहभागिता निभाई। समारोह के अंत में श्री आनंद पांडेय ने सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों एवं आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का संदेश देता यह आयोजन बचेली के लिए यादगार बन गया। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने एक बार फिर साबित किया कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी लोककला, लोकसंस्कृति और यहां के प्रतिभाशाली कलाकारों में बसती है।





