सिवनी के जंबो सीताफल की दुनिया है दीवानी! देश भर में होती है सप्लाई, वजन में 1 किलो तक

मध्य प्रदेश : सिवनी जिले का जंबो सीताफल अपने बड़े आकार और खास पहचान के लिए मशहूर है। इसे भूतबंधानी सीताफल के नाम से भी जाना जाता है। जून 2026 में इस फल को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिला, जिससे इसे क्षेत्रीय पहचान के साथ बाजार में अलग पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
200 ग्राम से 1 किलो तक होता है वजन
जंबो सीताफल का आकार सामान्य सीताफल से बड़ा होता है। इसका वजन करीब 200 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक हो सकता है। इसी बड़े आकार के कारण इसे जंबो सीताफल कहा जाता है। स्थानीय स्तर पर इसकी खास पहचान और मांग के चलते यह फल किसानों और दूसरे उत्पादकों के लिए आय का अहम जरिया बन गया है।
सालाना करीब 6,090 टन उत्पादन
स्थानीय लोगों के लिए भूतबंधानी सीताफल की पैदावार और बिक्री आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में हर साल करीब 6,090 टन सीताफल का उत्पादन होता है। इस फल की मांग सिवनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर और वाराणसी सहित कई शहरों के बाजारों तक पहुंचाया जाता है।
आइसक्रीम से लेकर रबड़ी तक बनते है कई व्यंजन
जंबो सीताफल का इस्तेमाल केवल फल के रूप में खाने तक सीमित नहीं है। इससे आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी और शेक जैसे कई स्वादिष्ट व्यंजन भी तैयार किए जाते है। इसके स्वाद और बड़े आकार के कारण यह स्थानीय खाद्य उत्पादों में भी अपनी जगह बना रहा है।
GI टैग से बढ़ेगी क्षेत्रीय पहचान की उम्मीद
GI टैग किसी उत्पाद को उसके खास भौगोलिक क्षेत्र से जोड़कर पहचान देता है। जंबो सीताफल को यह टैग मिलने से सिवनी के इस खास फल की पहचान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे उत्पाद के प्रचार, बाजार तक पहुंच और स्थानीय उत्पादकों को पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
पैदावार बढ़ाने पर उद्यानिकी विभाग का जोर
राज्य सरकार का उद्यानिकी विभाग जंबो सीताफल की पैदावार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। उद्देश्य है कि इस फल की क्षेत्रीय पहचान मजबूत हो और यह स्थानीय लोगों के लिए कारोबार तथा आय का बेहतर साधन बन सके।



