छत्तीसगढ़

रायपुर में पेड़ों को मिली खुली सांस: 2302 ट्री गार्ड और 571 कंक्रीट घेरे हटाकर शुरू हुआ हरियाली बचाने का बड़ा अभियान

 रायपुर :पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रहा प्रोजेक्ट पुनर्जीवन अब तेजी से जमीन पर असर दिखाने लगा है। जिला प्रशासन और नगर निगम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसे पेड़ों और पौधों के आसपास बने अवरोध हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है, जो उनके प्राकृतिक विकास में बाधा बन रहे थे। अब तक 2302 ट्री गार्ड और 571 जगहों पर बने कंक्रीट के घेरे व पेवर हटाए जा चुके हैं।

कंक्रीट और ट्री गार्ड से घिरे थे पौधे

नगर निगम क्षेत्र के कई इलाकों में पौधों के चारों ओर ट्री गार्ड, कंक्रीट संरचनाएं और पेवर ब्लॉक लगे हुए थे। इनकी वजह से जड़ों तक पर्याप्त मिट्टी, पानी और हवा नहीं पहुंच पा रही थी, जिससे पौधों का स्वाभाविक विकास प्रभावित हो रहा था।

इन अवरोधों को हटाने के बाद अब बारिश का पानी सीधे मिट्टी तक पहुंचेगा और जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ प्रोजेक्ट पुनर्जीवन

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट पुनर्जीवन शुरू किया है। कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

राज्यपाल रमेन डेका की पर्यावरण संबंधी चिंता के बाद इस पहल को और गति दी गई। इसके तहत नगर निगम के सभी 10 जोनों में अधिकारियों को ऐसे पौधों की पहचान करने के निर्देश दिए गए, जिनके चारों ओर कृत्रिम अवरोध बने हुए थे।

10 जोनों में चल रहा निरीक्षण और कार्रवाई

नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में जोन स्तर पर लगातार निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन स्थानों को चिन्हित किया गया, जहां ट्री गार्ड और कंक्रीट संरचनाओं के कारण पौधों की जड़ों तक प्राकृतिक संसाधन ठीक से नहीं पहुंच पा रहे थे।

पहचान के बाद संबंधित स्थानों पर अभियान चलाकर ट्री गार्ड, कंक्रीट के घेरे और पेवर ब्लॉक हटाए जा रहे हैं।

पौधों को मिलेगा प्राकृतिक विकास का मौका

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, अवरोध हटने से पौधों को खुला वातावरण मिलेगा और उनकी जड़ें बेहतर तरीके से फैल सकेंगी। मिट्टी में नमी बनी रहेगी, बारिश का पानी सीधे जड़ों तक पहुंचेगा और हवा का संचार भी बेहतर होगा।

प्रोजेक्ट पुनर्जीवन का उद्देश्य केवल पेड़ों के आसपास की संरचनाएं हटाना नहीं, बल्कि शहर की हरियाली को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हुए पौधों को प्राकृतिक रूप से विकसित होने का अवसर देना है।

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