छत्तीसगढ़

गरीबों के पक्के घर का सपना कैसे फंस गया भ्रष्टाचार में, बीजापुर के बोड़गा में 124 आवासों की राशि पर उठे गंभीर सवाल

 बस्तर : संभाग के बीजापुर जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। भैरमगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत इतामपार के आश्रित ग्राम बोड़गा के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्वीकृत आवासों के नाम पर सरकारी राशि तो निकाली गई, लेकिन कई हितग्राहियों को उनके हिस्से की रकम नहीं मिली और मकान भी तैयार नहीं हुए।ग्रामीणों के मुताबिक गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 124 से अधिक मकान स्वीकृत हुए थे। आरोप है कि पंचायत सचिव कोमल निषाद ने हितग्राहियों के खातों से पहली किस्त के 30 हजार और दूसरी किस्त के 55 हजार रुपये निकलवाए। इसके बाद कथित तौर पर हितग्राहियों को केवल 500-500 रुपये देकर यह कहा गया कि उनके मकान बनवा दिए जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय बाद भी इन आवासों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है।

विधायक से मुलाकात के बाद प्रशासन तक पहुंची शिकायत

मामले को लेकर ग्रामीणों ने बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधायक ग्रामीणों के साथ जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता चौबे से मिले और पूरे मामले की जानकारी दी।ग्रामीणों ने आवास योजना की राशि, निर्माण की स्थिति और हितग्राहियों को कथित तौर पर कम रकम दिए जाने की जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस ने बनाई सात सदस्यीय जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी जांच समिति गठित की है। विधायक विक्रम मंडावी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय दल बनाया गया। समिति 3 सितंबर को बोड़गा गांव पहुंची और प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से मुलाकात की।जांच दल ने गांव में स्वीकृत आवासों की वास्तविक स्थिति भी देखी। इस दौरान हितग्राहियों से आवास निर्माण, राशि के भुगतान और पंचायत स्तर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी जानकारी ली गई।

विधायक ने कहा – गरीब आदिवासियों के साथ अन्याय

मौके का निरीक्षण करने के बाद विधायक विक्रम मंडावी ने प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हर परिवार का सपना अपने पक्के घर का होता है, लेकिन बोड़गा के ग्रामीणों से बातचीत और मौके की स्थिति देखने के बाद योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।विधायक ने आरोप लगाया कि गरीब आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है और वर्षों बाद सरकारी योजनाओं की पहुंच इन गांवों तक बनी है। ऐसे में यदि इसी स्तर पर भ्रष्टाचार होता है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी।फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों और आवासों की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना की राशि में कितनी गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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