पाटेश्वर धाम विवाद ने फिर पकड़ा तूल: आदिवासी नेताओं को रोका गया, बालोद में बढ़ी हलचल

छत्तीसगढ़ : बालोद जिले में पाटेश्वर धाम को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। धाम क्षेत्र का जायजा लेने जा रहे आदिवासी समाज के प्रमुख पदाधिकारियों को पुलिस द्वारा रोक दिए जाने के बाद मामला गरमा गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
जामड़ी पाट पहुंचने से पहले रोके गए समाज के प्रतिनिधि
बताया जा रहा है कि आदिवासी समाज के प्रतिनिधि जामड़ी पाट क्षेत्र का निरीक्षण करने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई और प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने पड़े।
स्थल निरीक्षण को लेकर बढ़ा विवाद
घटना के बाद प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच बहस तेज हो गई है। समाज के लोगों का कहना है कि वे केवल विवादित स्थल का निरीक्षण करने जा रहे थे, जबकि प्रशासन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इसी वजह से मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
वन भूमि पर निर्माण को लेकर उठ रहे सवाल
विवाद का केंद्र तूएंगोंदी गांव की वन भूमि और पाटेश्वर धाम परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को माना जा रहा है। आदिवासी समाज का आरोप है कि वन क्षेत्र में नियमों के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो तत्काल कार्रवाई की जाए।
हजारों लोगों के प्रदर्शन से पहले भी गरमा चुका है मामला
इस मुद्दे को लेकर सर्व आदिवासी समाज पहले भी बड़े स्तर पर आंदोलन कर चुका है। जून की शुरुआत में हजारों लोग बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जिसके चलते प्रशासन को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी।
प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा
बढ़ते दबाव के बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। समाज की मांग थी कि विवादित निर्माण कार्य को रोका जाए और वन भूमि से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच कराई जाए।
अधिकारियों ने समाज को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। साथ ही प्रशासन ने कार्रवाई के लिए 20 जून तक का समय मांगा। इस आश्वासन के बाद समाज ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया।
चेतावनी: समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर होगा आंदोलन
सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष परते ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
वन भूमि को अधिकार और पहचान का मुद्दा मान रहा समाज
आदिवासी समाज का कहना है कि वन भूमि केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकारों, परंपराओं और पहचान से जुड़ा विषय है। इसलिए इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
20 जून पर टिकी प्रशासन और समाज की नजर
फिलहाल बातचीत के बाद स्थिति शांत दिखाई दे रही है, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की निगाहें 20 जून पर टिकी हैं, क्योंकि प्रशासन ने इसी तारीख तक कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है।
क्या फिर होगा बड़ा आंदोलन?
यदि तय समय सीमा के भीतर कोई स्पष्ट निर्णय या कार्रवाई सामने नहीं आती है, तो बालोद में एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि पाटेश्वर धाम विवाद अब जिले के सबसे चर्चित सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है।




