छत्तीसगढ़

अब घर बैठे मिलेगी सरकारी रेट पर रेत, माफिया पर लगाम लगाने CMDC लाएगा नया ऑनलाइन सिस्टम

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेत माफिया पर शिकंजा कसने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अवैध खनन और खनिज माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) ने रेत आपूर्ति के लिए नई ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद लोगों को सरकारी निर्धारित दर पर घर बैठे रेत उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे मनमानी कीमतों और बिचौलियों पर रोक लग सकेगी।

बिलासपुर की घुटकू रेत खदान से होगी शुरुआत

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत बिलासपुर जिले की घुटकू रेत खदान को इस नई व्यवस्था के लिए चुना गया है। सीएमडीसी ने इसकी नीति तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद बारिश का मौसम समाप्त होते ही इस खदान से ऑनलाइन रेत बिक्री शुरू किए जाने की तैयारी है।

वेबसाइट से होगी बुकिंग, घर तक पहुंचेगी रेत

नई व्यवस्था के तहत सीएमडीसी की वेबसाइट पर विशेष ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा। यहां उपभोक्ता रेत की उपलब्धता, दैनिक दर और बुकिंग की जानकारी देख सकेंगे। ऑनलाइन भुगतान के बाद रेत सीधे उपभोक्ता तक पहुंचाई जाएगी। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी।

ठेकेदारों की भूमिका खत्म, पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया

नई प्रणाली में रेत की बिक्री से निजी ठेकेदारों की भूमिका समाप्त कर दी जाएगी। सीएमडीसी स्वयं लोडिंग, अनलोडिंग और आपूर्ति की पूरी व्यवस्था संभालेगा। परिवहन शुल्क भी प्रति किलोमीटर के आधार पर तय होगा, जिससे उपभोक्ताओं को स्पष्ट और पारदर्शी दरों पर रेत मिलेगी। ट्रैक्टर और ट्रक, दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

रेत माफिया की मनमानी पर लगेगी रोक

हर वर्ष बारिश से पहले अवैध भंडारण कर मानसून के दौरान ऊंचे दामों पर रेत बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद रेत की उपलब्धता और कीमतें सार्वजनिक रहेंगी, जिससे कृत्रिम कमी पैदा कर महंगी बिक्री करना आसान नहीं होगा।

एक दिन में तय सीमा तक ही मिलेगी रेत

सीएमडीसी ने नई नीति में एक उपभोक्ता को प्रतिदिन निर्धारित सीमा तक ही रेत उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा है। वेबसाइट पर खदान की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध स्टॉक और दैनिक दर भी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और किसी प्रकार की कालाबाजारी की गुंजाइश न रहे।

पहले भी कई बार बदली व्यवस्था, नहीं मिली थी राहत

राज्य में रेत खदानों के संचालन की व्यवस्था पहले ग्राम पंचायतों और बाद में निजी ठेकेदारों को सौंपने जैसे कई प्रयोग किए गए, लेकिन उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। आरोप लगते रहे कि नियमों के बावजूद रेट सूची प्रदर्शित नहीं की जाती थी और सिंडिकेट बनाकर मनमाने दाम वसूले जाते थे। अब सीएमडीसी की नई ऑनलाइन व्यवस्था से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।

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