मंत्री के आदेश के बाद भी नहीं खत्म हुआ शिक्षकों का अटैचमेंट, बिलासपुर में डीईओ-बीईओ की कार्यशैली पर उठे सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद बिलासपुर जिले में व्यवस्था में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बीच कई शिक्षक अब भी विभिन्न कार्यालयों में संलग्न बताए जा रहे हैं। इसे लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं दिखी कार्रवाई
23 जून को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेशभर में वर्षों से चल रहे शिक्षकों के अटैचमेंट पर नाराजगी जताई गई थी। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी संलग्न शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में तत्काल वापस भेजा जाए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो।इसके बाद 26 जून को लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर संलग्नीकरण समाप्त करने तथा इसकी पालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे।हालांकि, बिलासपुर जिले में अब तक इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि आदेश के बाद तुरंत सभी संलग्न शिक्षकों को कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना स्थल भेजा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बीईओ के आदेश पर भी उठे सवाल
बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी आदेश को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि आदेश की भाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे संलग्नीकरण की व्यवस्था जारी रखने की गुंजाइश बनी हुई है।बताया जा रहा है कि बीईओ कार्यालय में भी कुछ शिक्षक अटैच हैं। इनमें तरुण कर्स और राजेश सिंह ठाकुर के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन्हें मूल स्कूलों में भेजने के बजाय अस्पष्ट आदेश जारी किया गया।
डीईओ कार्यालय में भी कई शिक्षक संलग्न होने का दावा
जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी कई शिक्षक और व्याख्याता संलग्न बताए जा रहे हैं। इनमें व्याख्याता जसपाल कौर, संगीता टंडन, अखिलेश कुमार तिवारी, प्रधान पाठक धीरेन्द्र कुमार देवांगन तथा शिक्षक संदीप कुमार त्रिपाठी, सोहित पटेल और सरोज बाजपेई सहित अन्य नाम शामिल होने का दावा किया जा रहा है।इसी तरह कलेक्टर कार्यालय में भी जयप्रकाश वैष्णव, प्रकाश रजक, बबीता सिंह और श्वेता चौहान सहित कुछ शिक्षकों के अटैच होने की चर्चा है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर बढ़ी चिंता
शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षक कार्यालयों में संलग्न रहेंगे तो सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार स्वयं अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश दे चुकी है, तब भी यदि उनका पालन नहीं हो रहा है तो विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे पहुंचेगी।




