राजधानी में छिपा वन्यजीवों का काला कारोबार…ऑनलाइन सौदे से लेकर दुकानों तक पहुंची अवैध बिक्री की कड़ी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में संरक्षित वन्यजीवों की अवैध खरीद फरोख्त का मामला एक बार फिर चर्चा में है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तोते और कछुओं की चोरी छिपे बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। वन्यजीव संरक्षण कानून में पाबंदी होने के बावजूद कुछ लोग बाजारों के साथ अब ऑनलाइन माध्यमों से भी इन जीवों का सौदा कर रहे हैं।वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से ऐसे कारोबार के सक्रिय होने की चर्चा है।
बिलासपुर में ग्राहक बनकर पहुंचा वनकर्मी, फिर खुला पूरा मामला
बिलासपुर में प्रतिबंधित कछुओं की बिक्री की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई का तरीका बदला। टीम के एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर पेट शॉप भेजा गया।वनकर्मी ने तय कीमत पर कछुआ खरीदा और बिक्री की पुष्टि होने के बाद टीम ने दुकान पर छापा मार दिया। इस कार्रवाई में चार इंडियन रूफ्ड टर्टल बरामद किए गए।
पेट शॉप संचालक गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर भेजा गया
यह कार्रवाई बिलासपुर के जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित पेट पाइंट शॉप में की गई। वन विभाग ने दुकान संचालक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।बाद में आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
सिर्फ दुकानदार तक कार्रवाई सीमित रहेगी या खरीदार भी आएंगे घेरे में?
इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर प्रतिबंधित कछुए दुकान तक पहुंचे कैसे।
वहीं यह भी चर्चा है कि जिन लोगों ने पहले से ऐसे वन्यजीव खरीदकर घरों में पाल रखे हैं, क्या उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी या केवल बिक्री करने वालों तक ही विभाग की कार्रवाई सीमित रहेगी।
अनुसूची एक में शामिल है कछुआ, खरीद बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित
वन विभाग के अनुसार, कछुआ अनुसूची एक का संरक्षित वन्यजीव है। इसकी खरीद और बिक्री दोनों कानूनन अपराध हैं।इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे इन जीवों का कारोबार कर रहे हैं। विभाग अब ऐसे स्थानों की जानकारी जुटाने में लगा है, जहां प्रतिबंधित वन्यजीवों की बिक्री की जा रही है।
वन विभाग ने शुरू की ऐसे कारोबारियों की तलाश
राज्य उड़नदस्ता टीम को बिलासपुर में कछुओं की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद उड़नदस्ता और बिलासपुर वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।विभाग का कहना है कि प्रतिबंधित जीवों की तस्करी और बिक्री करने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा। अब निगाह उन नेटवर्क पर है, जो इन वन्यजीवों को बाजार तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।




