शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत…ED और ACB-EOW की चुनौती खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी करप्शन ब्यूरो-आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हाई कोर्ट से मिली जमानत बरकरार रहेगी।
जांच एजेंसियों की अपील नहीं हुई स्वीकार
ED और ACB/EOW ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसियों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उनकी अपील खारिज कर दी।चैतन्य बघेल को पहले ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। बाद में ACB/EOW ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में जेल में रहते हुए उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था।
1000 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप
ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब सिंडिकेट के संचालन में चैतन्य बघेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने लगभग 1000 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन को संभाला।वहीं ACB/EOW का आरोप है कि कथित घोटाले से उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपये का लाभ मिला और पूरे शराब घोटाले का आकार 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।हालांकि, इन सभी आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और किसी भी अदालत ने अब तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया है।
क्या है शराब घोटाला मामला
ईडी की जांच के आधार पर ACB/EOW ने शराब घोटाले से जुड़ी एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक कथित सिंडिकेट के माध्यम से शराब कारोबार में अवैध कमीशन वसूला गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
ईडी के अनुसार, इस कथित सिंडिकेट में तत्कालीन आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और अन्य प्रभावशाली लोग शामिल थे। जांच में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई लोगों के नाम सामने आए हैं।
2019 में कथित सिंडिकेट बनने का दावा
जांच एजेंसियों के मुताबिक फरवरी 2019 में रायपुर के एक होटल में डिस्टिलरी संचालकों की बैठक हुई थी। आरोप है कि इसी बैठक में कथित कमीशन व्यवस्था का खाका तैयार किया गया, जिसके तहत शराब की प्रत्येक पेटी पर कमीशन तय किया गया और पूरे कारोबार को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर संचालन किया गया।
कई आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
इस मामले में अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कुछ आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि अन्य की तलाश जांच एजेंसियां कर रही हैं।




