छत्तीसगढ़

मालगाड़ी हादसों की जांच में खुली बड़ी लापरवाही, रेलवे अब निजी कंपनियों से वसूलेगा भारी जुर्माना

 बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल में जुलाई महीने में हुए दो बड़े मालगाड़ी हादसों की संयुक्त जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में दोनों घटनाओं के पीछे गंभीर लापरवाही और तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं।जांच के बाद रेलवे ने हादसों के लिए जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। चांपा स्थित साइडिंग हादसे में निजी कंपनी की लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद उससे नुकसान की भरपाई और जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

बिलासपुर यार्ड हादसा: वैगन में बचा कोयला बना वजह

11 जुलाई को बिलासपुर यार्ड में हुए वैगन डिरेलमेंट की जांच में कई कारण सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार BOXNS/E-505 रेक लाइन नंबर-4 से मिडिल लाइन की ओर जा रही थी, तभी ब्रेक वैन से 22वें नंबर पर लगे वैगन संख्या ECOR-24122417737 की आगे की बोगी पटरी से उतर गई।जांच में पाया गया कि वैगन में करीब 7 टन अवशिष्ट कोयला बचा हुआ था। इसके कारण वैगन का संतुलन बिगड़ा और कर्व वाले हिस्से में पहियों पर दबाव असमान हो गया। रेल ट्रैक की स्थिति भी हादसे का एक कारण बनी, जिससे पहिया पटरी से उतर गया।

एक्सपायर्ड बीपीसी के साथ दौड़ रही थी ट्रेन

जांच में यह भी सामने आया कि ट्रेन को एक्सपायर्ड ब्रेक पावर सर्टिफिकेट (BPC) के साथ चलाया गया था। बीपीसी की वैधता 7 जुलाई को खत्म हो चुकी थी, जबकि हादसा 11 जुलाई को हुआ।इसके अलावा वैगन की तकनीकी स्थिति, लेटरल क्लियरेंस और ट्रैक कर्व में बदलाव जैसी कमियां भी पाई गईं। हादसे के बाद करीब 252 मीटर तक घिसटने के निशान मिले और 465 से ज्यादा स्लीपर व अन्य ट्रैक उपकरणों को नुकसान पहुंचा।जांच समिति ने अंतिम अनलोडिंग प्वाइंट को मुख्य जिम्मेदार माना है। वहीं परिचालन, यांत्रिक और इंजीनियरिंग विभाग की भी सहायक जिम्मेदारी तय की गई है।

नैला साइडिंग हादसे में प्रबंधन की गलती आई सामने

22 जुलाई को नैला रेलवे स्टेशन स्थित पीएमसीजे महावीर कोल वाशरीज प्राइवेट लिमिटेड साइडिंग में हुए हादसे की जांच में साइडिंग प्रबंधन की लापरवाही सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने ट्रेलिंग पॉइंट को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार क्लैंप नहीं किया था। लोडिंग के बाद जब रेक को वापस साइडिंग की ओर ले जाया जा रहा था, तभी पॉइंट खुल गया।

करीब 20 वैगनों के गुजरने के बाद दबाव के कारण पॉइंट बदल गया, जिससे पहिए अलग-अलग लाइनों पर चले गए। इस वजह से चार वैगन पटरी से उतर गए, जिनमें दो पूरी तरह पलट गए।

निजी कंपनी से वसूली जाएगी नुकसान की रकम

नैला हादसे में पॉइंट और क्रॉसिंग के कई हिस्सों सहित स्लीपरों को नुकसान पहुंचा। रेलवे ने हादसे के लिए साइडिंग प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए नुकसान की भरपाई कराने का फैसला लिया है।रेलवे करीब 5 लाख रुपये से अधिक के नुकसान, रिरेलमेंट ऑपरेशन और अन्य खर्चों की वसूली की तैयारी कर रहा है। दोनों हादसों में ट्रेन क्रू की ब्रेथ एनालाइजर जांच सामान्य पाई गई।बिलासपुर यार्ड हादसे के समय मालगाड़ी की अधिकतम रफ्तार भी केवल 16 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई थी।

रेलवे ने शुरू की रिकवरी की प्रक्रिया

बिलासपुर मंडल के सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह ने बताया कि मालगाड़ी में निजी कंपनी का कोयला लदा था। हादसे से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और संबंधित पक्ष से इसकी भरपाई कराई जाएगी।

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