हाईकोर्ट का बड़ा फैसला..स्टाफ की कमी का बहाना नहीं चलेगा.. महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव देने के दिए आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी नियमों के तहत चाइल्ड केयर लीव पाने का पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक दिक्कत का हवाला देकर उसकी छुट्टी से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्रीय जेल बिलासपुर में पदस्थ महिला वार्डर को चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश जारी किया है।
जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए मांगी थी अतिरिक्त छुट्टी
याचिकाकर्ता मंदा तिवारी केंद्रीय जेल बिलासपुर में जेल वार्डर के पद पर कार्यरत हैं। 10 सितंबर 2025 को उन्होंने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। उन्हें 13 अप्रैल 2026 से 11 जुलाई 2026 तक चाइल्ड केयर लीव प्रदान की गई थी।छुट्टी समाप्त होने के बाद उन्होंने बच्चों की कम उम्र और लगातार मां की देखभाल की जरूरत का हवाला देते हुए 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव का आवेदन किया। हालांकि जेल प्रशासन ने महिला वार्डरों की कमी और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का हवाला देते हुए उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की दलील को किया खारिज
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर जस्टिस विभु दत्त गुरू की एकल पीठ ने जेल अधीक्षक से शपथपत्र के माध्यम से जवाब मांगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स, 2010 के नियम 38-सी के तहत पात्र कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव देना उसका वैधानिक अधिकार है।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्टाफ की कमी या प्रशासनिक जरूरतें किसी कर्मचारी को कानूनी रूप से मिलने वाले लाभ से वंचित करने का आधार नहीं बन सकतीं। कर्मचारियों की कमी दूर करना और आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि उसका भार कर्मचारी पर डाला जाए।
बच्चों के हित को बताया सबसे महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य बच्चे के शुरुआती वर्षों में उसकी उचित देखभाल और परवरिश सुनिश्चित करना है। ऐसे में जुड़वां बच्चों की कम उम्र और मां की देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए केवल स्टाफ की कमी का हवाला देकर छुट्टी से इनकार करना मनमाना और अनुचित है।इसी आधार पर अदालत ने याचिकाकर्ता को चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश जारी किया।
जेल प्रशासन ने बताई कर्मचारियों की स्थिति
सुनवाई के दौरान जेल अधीक्षक ने शपथपत्र में बताया कि केंद्रीय जेल बिलासपुर में वार्डर के 106 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 82 पद भरे हुए हैं जबकि 24 पद रिक्त हैं। महिला वार्डरों की स्थिति और भी सीमित है, जहां केवल 13 महिला वार्डर कार्यरत हैं। प्रशासन ने इसी कमी को अतिरिक्त अवकाश न देने का कारण बताया था।
महिला कर्मचारियों के लिए अहम मिसाल
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कर्मचारी नियमों के अनुसार पात्र है, तो प्रशासनिक कठिनाइयों के आधार पर उसके वैधानिक अधिकारों को नहीं रोका जा सकता। यह निर्णय विशेष रूप से महिला कर्मचारियों और मातृत्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




