CGPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से झटका, स्वास्थ्य के आधार पर भी नहीं मिली जमानत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा 2020-2021 में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर जमानत की मांग करने वाले सोनवानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। साथ ही, गंभीर बीमारी और जेल में समुचित इलाज उपलब्ध नहीं होने के पर्याप्त प्रमाण के बिना धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत राहत नहीं दी जा सकती।
जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं सोनवानी
CGPSC परीक्षा घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले 20 अगस्त 2026 को रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन यहां भी उनकी याचिका स्वीकार नहीं की गई।
हृदय संबंधी परेशानी और पेसमेकर का दिया हवाला
सोनवानी की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जमानत का आधार बनाया गया। उनके वकील ने बताया कि हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को उन्हें अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था। इसके बाद स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह भी दी गई थी।
बचाव पक्ष ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति का उल्लेख करते हुए जमानत देने की मांग की। हालांकि, अदालत को इन आधारों पर राहत देने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले कि आरोपी किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं या जेल में उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
ईडी ने बेहतर इलाज की उपलब्धता का दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि आवश्यकता पड़ने पर सोनवानी को रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराकर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इस दलील के साथ एजेंसी ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने का विरोध किया।बचाव पक्ष की ओर से सह-आरोपियों को जमानत मिलने का तर्क भी रखा गया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे सोनवानी को राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
चार्जशीट में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, CGPSC परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं की गई थीं। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद पहुंचाने के लिए आर्थिक लेन-देन हुआ था।
चार्जशीट में करीब 3.45 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया गया है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये लेने और इस रकम को विभिन्न माध्यमों से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपों की जांच जारी
ईडी की जांच का मुख्य केंद्र भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार से प्राप्त धन और उसके लेन-देन से जुड़ा है। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में पूर्व अध्यक्ष की भूमिका को लेकर आरोप दर्ज किए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले में अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। फिलहाल, हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के कारण टामन सिंह सोनवानी की न्यायिक हिरासत जारी है।
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