छत्तीसगढ़

शासन के आदेश के बावजूद जंगलपुर के दो व्याख्याता मूल विद्यालय नहीं लौटे

छात्रों की पढ़ाई हो रही प्रभावित, ग्रामीण जमकर नाराज़

00 मामला छुईखदान ब्लॉक के ग्राम जंगलपुर में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का
00 कलेक्टर, शिक्षा विभाग व जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ
00 ग्रामीणों ने दी अंतिम चेतावनी, जल्द शासन के आदेश का पालन नहीं हुआ तो होगा जन आंदोलन

खैरागढ़. केसीजी कलेक्टर, शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों व जिले के जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन देने के बावजूद आज पर्यन्त कुछ नहीं हुआ जिसकी वजह से छात्रों की पढ़ाई बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है पर जिम्मेदारों के कान को जूं नहीं रेंग रहा है, हम बात कर रहे है छुईखदान ब्लॉक के ग्राम जंगलपुर में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जहां पर शासन के आदेश के बावजूद दो व्याख्याता मूल विद्यालय आज तक नहीं लौटे है. गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा संलग्न (अटैच) शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजने के स्पष्ट निर्देश जारी किये जाने के बावजूद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जंगलपुर में पदस्थ दो व्याख्याता आज तक अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं किये हैं जिसकी वजह से इस क्षेत्र के छात्रों की पढ़ाई बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों व छात्रों के परिजनों में इसे लेकर बहुत गहरी नाराज़गी व्याप्त है.

बोधन जोशी जिला मुख्यालय खैरागढ़ व कल्पना अग्रवाल छुरिया में पदस्थ, बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

पाठकों को बता दे कि बोधन जोशी (व्याख्याता, अंग्रेजी) वर्तमान में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के जिला कार्यालय मुख्यालय खैरागढ़ में क्षेत्र संवाहक के रूप में संलग्न हैं वही कल्पना अग्रवाल (व्याख्याता, जीवविज्ञान) वर्तमान में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, छुरिया में संलग्न हैं और इस वजह से बच्चों के भविष्य से बड़ा खिलवाड़ हो रहा है जबकि इस क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा संलग्न शिक्षकों को मूल विद्यालयों में लौटाने के निर्देश जारी किये जाने के बाद भी जिले के संबंधित अधिकारियों द्वारा इन निर्देशों का पालन नहीं कराया जा रहा है जबकि ग्रामीण कई बार जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, केसीजी कलेक्टर एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लिखित एवं मौखिक रूप से निवेदन कर चुके है पर इसके बावजूद आज पर्यन्त इन दोनों व्याख्याताओं को उनकी मूल स्थापना ग्राम जंगलपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लाने के लिये कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.

जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा समस्त छात्र भुगत रहें

ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का खामियाजा इस विद्यालय में पढ़ने वाले समस्त छात्र-छात्राओं को बहुत ज़्यादा भुगतना पड़ रहा है और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की अनुपस्थिति से अध्ययन-अध्यापन कार्य बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है जिसकी वजह से छात्रों के भविष्य पर विपरीत प्रभाव भी पड़ रहा है पर जिम्मेदारों को उनकी कोई फ़िक्र नहीं है. नाराज़ ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि शासन के आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करते हुये दोनों व्याख्याताओं को उनकी मूल पद स्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जंगलपुर में तत्काल कार्यभार ग्रहण कराया जाये वही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वो अपने बच्चों के भविष्य के खातिर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से बड़े जन आंदोलन के लिये भी मजबूर होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिले के समस्त जिम्मेदार अधिकारियों की होगी.

विशेषज्ञ शिक्षकों के अपने मूल विद्यालय में वापस नहीं आने से, शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहें छात्र- एमन जंघेल

हमें शाला प्रबंधन एवं विकास समिति शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जंगलपुर के पूर्व अध्यक्ष ऐमन जंघेल ने बताया कि विगत कई वर्षों से जन शिकायत पोर्टल में शिकायत करने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया है और वर्तमान में सभी गैर शिक्षकीय कार्य में संलग्न शिक्षकों को मूल शाला में भेजने के लिये शासन द्वारा आदेश जारी होने के बाद भी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जंगलपुर के दो शिक्षक अब तक इस स्कूल में कार्यभार ग्रहण नहीं किये है जिससे पता चलता है कि जिले के जिम्मेदार माने जाने वाले ये विभागीय अधिकारी उन दोनों शिक्षकों के ऊपर जरूरत से ज्यादा ही मेहरबान है. गौरतलब है कि दो विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के अपने मूल विद्यालय में वापस नहीं आने की वजह से यहां पढ़ने वाले छात्र बेहतर शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहें है. पाठकों को बता दे कि ग्राम जंगलपुर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत इन छात्रों की इस गंभीर समस्या को लेकर हमनें केसीजी जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल केपी साव से इस मामले में शिक्षा विभाग का पक्ष जानने उनके मोबाईल नंबर पर सम्पर्क किया पर खबर लिखे जाने तक उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया था इसलिए उनसे बात नहीं हो पाई.

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