छत्तीसगढ़

7 साल बाद भी बेअसर जिला अस्पताल का ब्लड बैंक, स्टॉक शून्य और लाइसेंस की कमी ने बढ़ाई मरीजों की परेशानी

 रायपुर :  पंडरी स्थित जिला अस्पताल में करीब सात वर्ष पहले बड़ी उम्मीदों के साथ ब्लड बैंक की शुरुआत की गई थी। उद्देश्य था कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ने पर तत्काल सुविधा मिल सके और उन्हें दूसरे संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यह ब्लड बैंक अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में असफल नजर आ रहा है।

रक्त की जरूरत पड़ते ही मरीजों के परिजनों की बढ़ जाती है भागदौड़

अस्पताल में भर्ती किसी मरीज को यदि रक्त की आवश्यकता होती है तो उसके परिजनों को आंबेडकर अस्पताल, रेडक्रास ब्लड बैंक या निजी ब्लड बैंकों का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक मौजूद होने के बावजूद मरीजों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वर्ष 2019 में शुरू की गई इस सुविधा का मकसद मरीजों की बाहरी संस्थानों पर निर्भरता खत्म करना था, लेकिन कई वर्षों बाद भी यह व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है।

स्टॉक शून्य की स्थिति ने खड़े किए कई सवाल

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यहां आपातकालीन परिस्थितियों में होल ब्लड यानी संपूर्ण रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। हालांकि वास्तविकता यह है कि ब्लड बैंक में लंबे समय से रक्त का कोई स्थायी स्टॉक मौजूद नहीं है।

प्रबंधन का तर्क है कि उपयोग कम होने के कारण रक्त खराब होने की आशंका रहती है, इसलिए स्टॉक नहीं रखा जाता। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड बैंक का मूल उद्देश्य ही जरूरत पड़ने पर तत्काल रक्त उपलब्ध कराना होता है।

सबसे जरूरी कंपोनेंट ब्लड की सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी

ब्लड बैंक में कंपोनेंट ब्लड से जुड़ी मशीनें और संसाधन मौजूद हैं, लेकिन इस सेवा के संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस अब तक नहीं मिल पाया है।

कंपोनेंट ब्लड आधुनिक चिकित्सा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें मरीज की बीमारी और जरूरत के अनुसार रक्त के अलग-अलग घटकों का उपयोग किया जाता है। लाइसेंस के अभाव में यह सुविधा वर्षों से शुरू नहीं हो पाई है।

मरीजों को दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहने की मजबूरी

जब भी किसी मरीज को कंपोनेंट ब्लड की जरूरत पड़ती है, अस्पताल प्रशासन या तो बाहर से रक्त मंगाने की व्यवस्था करता है या फिर मरीज को अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

इसके विपरीत प्रदेश के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड स्टोरेज यूनिट की मदद से रेडक्रास ब्लड बैंक के सहयोग से जरूरत के अनुसार रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है।

लाइसेंस प्रक्रिया जारी, प्रबंधन ने दिया आश्वासन

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बीके सिन्हा के अनुसार कंपोनेंट ब्लड सेवा के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि अनुमति मिलने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन इसके बाद मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अस्पताल प्रशासन अन्य संस्थानों से रक्त की व्यवस्था कर मरीजों को सहायता उपलब्ध कराता है।

सवाल यह कि सुविधा है तो लाभ कब मिलेगा

अस्पताल परिसर में जगह, मशीनें और आधारभूत सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद ब्लड बैंक का पूर्ण रूप से सक्रिय न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। मरीज और उनके परिजन अब यह जानना चाहते हैं कि वर्षों पहले शुरू की गई यह सुविधा आखिर कब अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर पाएगी।

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