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सोना चमका, चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार, लेकिन विशेषज्ञों को क्यों दिख रहा आगे बड़ा जोखिम?

 जुलाई का यह कारोबारी सप्ताह सोने और चांदी के बाजार के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सप्ताह के दौरान वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका से मिले आर्थिक संकेतों ने कीमती धातुओं की चाल तय की। कई बार दबाव बनने के बावजूद सप्ताह के अंत में दोनों धातुएं मजबूती के साथ बंद हुईं।

भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ दुनिया के कई हिस्सों में बनी अनिश्चितता ने निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ खींचा। दूसरी ओर कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने से महंगाई को लेकर चिंता भी गहराई है। इसका असर आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।

एमसीएक्स पर सोना मजबूत, सर्राफा बाजार में अलग तस्वीर

शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर पांच अगस्त डिलीवरी वाला सोना 245 रुपये की बढ़त के साथ 1,42,821 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसके विपरीत दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में करीब 2 हजार रुपये की गिरावट दर्ज की गई और कीमत लगभग 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना सीमित बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। कॉमेक्स पर यह 0.14 प्रतिशत चढ़कर 4,053 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं बुलियन बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,43,750 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार 999 शुद्धता वाला सोना 1,42,757 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

चांदी ने निवेशकों को दिया बेहतर रिटर्न

इस सप्ताह चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया। शुक्रवार तक इसका भाव 6,974 रुपये बढ़कर 2,22,721 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। सप्ताह की शुरुआत में चांदी करीब 2,15,474 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी।विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग में मजबूती और वैश्विक अनिश्चितताओं ने चांदी की कीमतों को अतिरिक्त सहारा दिया।

सप्ताह भर के कारोबार में बने कई अहम स्तर

कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के मुताबिक सप्ताह के दौरान सोने ने 1,46,000 रुपये का उच्च स्तर और 1,41,081 रुपये का निचला स्तर बनाया। अंत में यह 1.56 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 1,43,106 रुपये पर बंद हुआ।चांदी ने भी शानदार तेजी दिखाई। इसने सप्ताह के दौरान 2,28,984 रुपये का ऊपरी स्तर और 2,17,325 रुपये का निचला स्तर छुआ। सप्ताह के अंत में चांदी 2.65 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,22,138 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

तेल की तेजी ने बढ़ाई बाजार की चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल ने भी बाजार का माहौल प्रभावित किया। सप्ताह के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल करीब 10.55 प्रतिशत बढ़कर 91.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर क्षेत्र में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो वैश्विक महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

फिर भी सुरक्षित निवेश की मांग उम्मीद से कम रही

युद्ध जैसे हालात बनने के बावजूद आम निवेशकों की ओर से सोने में वैसी मजबूत खरीदारी नहीं दिखी, जैसी संकट के समय आमतौर पर देखने को मिलती है। हालांकि दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने सोने की कीमतों को गिरने से बचाए रखा।सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली। अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण निवेशकों ने ऊंचे भाव पर बिकवाली की।

अब फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी नजर

बाजार की अगली बड़ी दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक तय कर सकती है। यदि ब्याज दरों में सख्ती के संकेत मिलते हैं तो सोने और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं नरम रुख अपनाए जाने की स्थिति में दोनों धातुओं में नई तेजी देखने को मिल सकती है।तकनीकी स्तरों की बात करें तो सोने के लिए 1,41,000 और 1,38,000 रुपये मजबूत सपोर्ट माने जा रहे हैं, जबकि 1,45,000 और 1,47,000 रुपये प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर हैं। चांदी में 2,16,000 और 2,10,000 रुपये सपोर्ट के रूप में देखे जा रहे हैं, जबकि 2,26,000 और 2,32,000 रुपये पर मजबूत रुकावट आने की संभावना जताई गई है।

निवेश से पहले रखें धैर्य

विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। ट्रेडर्स को सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के आधार पर रणनीति बनानी चाहिए। तेजी के दौरान मुनाफावसूली और गिरावट आने पर चरणबद्ध खरीदारी का तरीका फिलहाल अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।

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