छत्तीसगढ़ में एल्डरमैन सूची पर सियासी घमासान, रायपुर में नामों पर विवाद, बिलासपुर की सूची अब भी अटकी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के लिए एल्डरमैन यानी मनोनीत पार्षदों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। करीब दो वर्ष पहले नगर निगम और नगर पालिकाओं के चुनाव संपन्न होने के बावजूद एल्डरमैन की नियुक्तियां लंबित थीं। अब सूची जारी होते ही कई नामों को लेकर पार्टी के भीतर और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
वित्त विभाग की आपत्तियों से अटकी थी प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक एल्डरमैन नियुक्ति की फाइल लंबे समय तक राज्य शासन में लंबित रही। बताया जा रहा है कि वित्त विभाग ने कुछ बिंदुओं पर दोबारा विचार करने की जरूरत जताई थी। खास तौर पर एल्डरमैन नियुक्तियों पर होने वाले खर्च और उसकी उपयोगिता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद भाजपा संगठन ने भी इस विषय पर अपनी राय सरकार के समक्ष रखी।
जानकारी के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लंबित सूची को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया गया और विभिन्न नगरीय निकायों के लिए नियुक्तियां घोषित कर दी गईं।
रायपुर की सूची पर सबसे ज्यादा विवाद
एल्डरमैन सूची जारी होने के बाद सबसे अधिक चर्चा रायपुर नगर निगम की नियुक्तियों को लेकर हो रही है। खासकर सूची में शामिल विनय ओझा के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विनय ओझा पूर्व महापौर एजाज ढेबर के करीबी रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि वह लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे, बाद में कांग्रेस में गए और विधानसभा चुनाव के दौरान दोबारा भाजपा में लौट आए। इसी वजह से उनके चयन को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप
एल्डरमैन नियुक्तियों के बाद भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने यह सवाल भी उठाया है कि वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर क्यों नहीं मिले। वहीं कुछ ऐसे नामों को लेकर भी चर्चा है, जो ठेकेदारी या अन्य गतिविधियों से जुड़े रहे हैं या पहले पार्षद रह चुके हैं।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि सभी नाम संगठन की अनुशंसा और वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बाद ही अंतिम रूप से तय किए गए हैं।
बिलासपुर की सूची पर अब भी नहीं बनी सहमति
रायपुर में सूची जारी होने के बावजूद बिलासपुर नगर निगम के एल्डरमैनों की घोषणा अब तक नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नामों को लेकर संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
बताया जा रहा है कि महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी की ओर से भी कुछ नाम प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा भाजपा संगठन और स्थानीय विधायकों की ओर से भी अलग-अलग नाम सुझाए गए हैं। कई प्रस्तावित नामों पर आपत्तियां दर्ज होने के कारण अंतिम सूची पर सहमति नहीं बन सकी।
प्रदेश नेतृत्व के प्रयास भी नहीं आए काम
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने भी आपसी सहमति बनाकर सूची जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मतभेद दूर नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि नगर निगम के भाजपा पार्षद दल के भीतर भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं बन पाया है, जिसके चलते बिलासपुर की एल्डरमैन सूची फिलहाल लंबित बनी हुई है।



