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SSC Scam Bengal: चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में घोटालों की फाइलें फिर खुलीं, कई दिग्गज नेताओं पर बढ़ सकता है दबाव

 कोलकाता : विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरम हो गया है। बीजेपी की जीत के साथ ही अब टीएमसी शासन के दौरान सामने आए घोटालों और जांच से जुड़ी फाइलें फिर सुर्खियों में हैं। माना जा रहा है कि बदले राजनीतिक समीकरण के बीच आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई तेज कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री पर केस नहीं, लेकिन पार्टी के बड़े चेहरे घेरे में
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। हालांकि, उनकी पार्टी के कई प्रभावशाली नेता गंभीर आरोपों और जांच का सामना कर रहे हैं, जिससे संगठन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

इन बड़े नामों पर गंभीर आरोप, जांच में तेज हलचल

  • पार्थ चटर्जी पर एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले में मुख्य भूमिका का आरोप है। करीब 26 हजार नियुक्तियों में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उन्हें 2022 में गिरफ्तार किया गया और 2025 में जमानत मिली।
  • अभिषेक बनर्जी का नाम भी सीबीआई और ईडी की जांच में सामने आया है, जो इस मामले से जुड़ा बताया जा रहा है।
  • शेख शाहजहां पर जमीन कब्जा, महिलाओं के उत्पीड़न और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
  • नुसरत जहां हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में जांच के दायरे में हैं, जिसमें खरीदारों से पैसे लेने के बावजूद फ्लैट न देने का आरोप है।
  • मदन मित्रा पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक धमकी जैसे मामलों में केस दर्ज हैं।

अन्य नेताओं पर भी शिकंजा, पूछताछ और कार्रवाई जारी
इसके अलावा देबाशीष कुमार का नाम जमीन घोटाले में सामने आया है, जिनसे 2026 में ईडी ने पूछताछ की। सबरीना यासमीन पर न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में एनआईए की कार्रवाई हुई है, जबकि सुजॉय हाजरा पर दंगा, चोरी और सरकारी कर्मचारी पर हमले जैसे आरोप दर्ज हैं।

पिछले वर्षों के बड़े घोटाले फिर चर्चा में
पश्चिम बंगाल में बीते कुछ सालों में कई बड़े घोटाले सामने आए, जिनमें एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाला, शारदा चिट फंड घोटाला, नारद स्टिंग ऑपरेशन, पीडीएस घोटाला और कोयला तस्करी जैसे मामले शामिल हैं। ये सभी केस अब एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।

आगे क्या: बदलते सत्ता समीकरण के साथ बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता और बढ़ सकती है। ऐसे में टीएमसी के कई नेताओं के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि लंबित मामलों में तेजी से कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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