शारदीय नवरात्रि 2026: पहले दिन से नवमी तक किस दिन किस देवी की पूजा? जानिए नौ स्वरूपों का महत्व

नई दिल्ली। शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्रि इस साल 11 अक्टूबर से शुरू होगा। पूरे नौ दिन तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि व सफलता की कामना करते हैं।नवरात्रि का हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां के इन नौ स्वरूपों का अलग-अलग महत्व है।
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। मां शैलपुत्री का स्वरूप शक्ति, दृढ़ता और स्थिरता का प्रतीक माना गया है।भक्त पहले दिन उनकी आराधना कर जीवन मे आत्मबल और मानसिक मजबूती की कामना करते हैं।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप तपस्या, संयम और त्याग से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी उपासना से धैर्य बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मबल मिलता है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें यह नाम मिला।मां चंद्रघंटा को साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनकी पूजा कर भय और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। देवी के इस रूप को ऊर्जा और सृजन शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से घर मे सकारात्मक वातावरण, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। वे भगवान कार्तिकेय की माता मानी जाती हैं। मां का यह स्वरूप ममता, वात्सल्य और शांति का प्रतीक है।भक्त उनसे बुद्धि, संतान सुख और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
छठा दिन: मां कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना की जाती है। देवी के इस रूप को शक्ति और साहस से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं मे मां कात्यायनी की पूजा को वैवाहिक सुख और मनोकामना पूर्ति से भी जोड़ा गया है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा होती है। देवी का यह स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए उन्हें कल्याणकारी बताया गया है।मान्यता है कि मां कालरात्रि की आराधना से भय कम होता है और व्यक्ति के भीतर साहस व आत्मविश्वास बढ़ता है।
आठवां दिन: मां महागौरी
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।इस दिन कई परिवारों मे कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। भक्त मां महागौरी से घर-परिवार मे शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
नवां दिन: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता मे उन्हें विभिन्न सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना गया है।नवमी पर कई घरों मे कन्या पूजन और हवन किया जाता है। भक्त मां सिद्धिदात्री से आध्यात्मिक शक्ति, सफलता और जीवन मे शुभ फल की कामना करते हैं।
नौ दिन की साधना, नौ रूपों की आराधना
शारदीय नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों की उपासना के लिए विशेष माने जाते हैं। पहले दिन मां शैलपुत्री से शुरू होने वाली आराधना नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ पूरी होती है।इन नौ दिनों मे भक्त शक्ति, धैर्य, साहस, शांति और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए मां दुर्गा की उपासना करते हैं।


