सोने-चांदी के भाव पर सबकी नजर, सोना 1.47 लाख के पार, चांदी में भी हलचल

मुंबई: सोने और चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की नजर बनी हुई है। हालांकि, त्योहार की छुट्टी के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सुबह के सत्र में कारोबार बंद है। सोने, चांदी और अन्य कमोडिटी में ट्रेडिंग शाम 5 बजे से दोबारा शुरू होगी।
इससे पहले सोमवार को वायदा बाजार में सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई थी। दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 618 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत टूटकर 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का भाव लगभग स्थिर रहा और यह 2,09,825 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
मुंबई में सोने के ताजा भाव
Bullion.co के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,340 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,062 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
एक साल में सोने से ज्यादा रिटर्न दे चुकी है चांदी
हाल के कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, पिछले एक साल में कीमती धातुओं ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। पिछले साल दशहरे के बाद से भारत में सोने की कीमत 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। इस दौरान चांदी ने इससे बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 45 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर क्यों बना दबाव?
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर महंगाई और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़ी चिंताओं का असर देखने को मिला। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका को मजबूत किया है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.1 प्रतिशत बढ़कर 4,144.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, हाजिर चांदी में 0.6 प्रतिशत की तेजी आई और इसका भाव 57.44 डॉलर प्रति औंस हो गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर भी डाल रहे असर
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर बढ़ता प्रतिफल सोने की कीमतों के लिए दबाव का कारण बना हुआ है। सोने से नियमित ब्याज आय नहीं होती, इसलिए जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों के लिए सोने का आकर्षण अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में सुधार से सुरक्षित निवेश के रूप में सरकारी बॉन्ड की मांग प्रभावित हुई। इससे बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई और बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा। मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने की तेजी को सीमित करने वाले कारकों में शामिल है।
फेडरल रिजर्व के फैसलों पर टिकी निवेशकों की नजर
निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीति संकेतों पर ध्यान दे रहे हैं। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अक्टूबर के दौरान सोने की कीमत मोटे तौर पर 4,100 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी रही है। सितंबर में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद इसमें कुछ स्थिरता दिखाई दी है। हालांकि, मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल के बीच बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में भी कीमती धातु की कीमत करीब 20 प्रतिशत नीचे बनी हुई है।
खरीदारों के लिए क्या है अहम?
त्योहारी खरीदारी करने वालों को एमसीएक्स पर शाम के कारोबार के दौरान कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव के साथ अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर की चाल और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेत भी महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, वायदा बाजार के भाव और आभूषण दुकानों पर मिलने वाली अंतिम कीमत में टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों के कारण अंतर हो सकता है।


