सोने में फिर आ सकती है तेज तेजी, JP Morgan ने बताया 5000 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान…जानिए किन वजहों से बढ़ सकती है कीमत

सोने : अगस्त में शानदार तेजी दिखाने के बाद सितंबर में सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। हालांकि, बाजार में इस कीमती धातु को लेकर लंबी अवधि में तेजी की उम्मीद बनी हुई है। अमेरिकी बैंकिंग कंपनी JP Morgan ने अनुमान जताया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 2027 के मध्य तक 5000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है।
अभी कहां पहुंचा सोने का भाव
अगस्त में सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था, लेकिन सितंबर में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई। World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत करीब 3.9 फीसदी नीचे आई, जबकि भारतीय बाजार में लगभग 4.6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।ताजा बाजार भाव की बात करें तो Comex पर सोना करीब 4400 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं घरेलू बाजार में MCX पर 5 अक्टूबर एक्सपायरी वाला 24 कैरेट सोना पिछले शुक्रवार को कारोबार समाप्त होने पर 1,54,263 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।
JP Morgan को क्यों दिख रही है आगे तेजी
JP Morgan के विश्लेषकों के मुताबिक सोने की कीमतों को कई ऐसे वैश्विक कारकों से सहारा मिल रहा है, जो आने वाले समय में इसकी मांग को मजबूत कर सकते हैं। बैंक का अनुमान है कि 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। इसके बाद 2027 के मध्य तक भाव 5000 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू सकता है।हालांकि यह अनुमान बाजार की मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित है और सोने की कीमत का सफर सीधा नहीं रहने की बात भी कही गई है।
डॉलर से लेकर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी तक, ये फैक्टर अहम
सोने की कीमत पर अमेरिकी डॉलर की चाल का सीधा असर पड़ता है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे मांग को सहारा मिल सकता है।इसके अलावा दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी कीमतों के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने की मांग को समर्थन मिलने की बात बाजार विश्लेषकों की ओर से कही जाती है।
भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ा सकता है सोने की मांग
युद्ध, व्यापारिक तनाव, प्रतिबंध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं। ऐसे माहौल में इसकी मांग बढ़ सकती है और कीमतों को समर्थन मिल सकता है।JP Morgan के मुताबिक कमजोर अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े, डॉलर से जुड़ी चिंताएं और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने सोने को 4400 डॉलर के ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई है। अमेरिकी सरकार के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता भी लंबी अवधि में सोने के प्रति निवेश रुचि को प्रभावित कर सकती है।
5000 डॉलर का रास्ता किन बातों पर निर्भर करेगा
सोने के 5000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान कई परिस्थितियों पर निर्भर है। डॉलर की दिशा, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, निवेशकों की मांग और वैश्विक आर्थिक स्थिति में बदलाव इसके लिए अहम होंगे। इसलिए JP Morgan का यह आंकड़ा एक अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
Jefferies ने भी सोने को लेकर दिया बड़ा अनुमान
JP Morgan के अलावा Jefferies की ओर से भी सोने को लेकर लंबी अवधि में काफी ऊंचा अनुमान सामने आया है। Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने कहा है कि मौजूदा स्तर से सोने की कीमत दोगुनी होकर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।उनके मुताबिक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की कोशिशों के बीच डॉलर में कमजोरी आती है तो इससे सोने की कीमतों को फायदा मिल सकता है। यह भी एक दीर्घकालिक बाजार अनुमान है और वास्तविक कीमतें आर्थिक परिस्थितियों तथा निवेश मांग में बदलाव के साथ ऊपर-नीचे हो सकती हैं।



