धनतेरस से पहले फिर महंगा होने लगा सोना, क्या अभी खरीदारी करना फायदेमंद रहेगा? समझें तेजी की वजह

Gold on Dhanteras: धनतेरस से ठीक पहले सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले तक बाजार विशेषज्ञ सोने के दाम में गिरावट की संभावना जता रहे थे, लेकिन अब उनके अनुमान बदलते नजर आ रहे हैं। सोने के साथ शेयर बाजार में भी मजबूती लौटने लगी है। ऐसे में निवेशकों और आम खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या धनतेरस पर सोना खरीदने का यह सही समय है या कीमतों में कुछ और गिरावट का इंतजार करना चाहिए।इस बदलाव के पीछे केवल त्योहारों की खरीदारी या शादी के सीजन में बढ़ती मांग जिम्मेदार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न में बदलाव ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है।
अमेरिकी चुनाव ने कैसे बदल दिया बाजार का रुख?
अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को झटका लगने के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई हलचल पैदा हुई है। चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी संसद में विपक्ष की स्थिति मजबूत होने से ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं।बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अब ट्रंप सरकार के लिए बड़े खर्च, टैक्स में कटौती और नई वित्तीय योजनाओं को आगे बढ़ाना पहले जितना आसान नहीं होगा। इससे अमेरिका की उधारी और सरकारी बॉन्ड जारी करने की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड और सोने का क्या है संबंध?
सोने की कीमतों को समझने के लिए अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड को जानना जरूरी है। जब अमेरिकी सरकार बाजार से कर्ज लेती है, तो वह निवेशकों को सरकारी बॉन्ड जारी करती है। इन बॉन्ड पर तय शर्तों के अनुसार ब्याज मिलता है। बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न को यील्ड कहा जाता है।जब अमेरिकी बॉन्ड पर ब्याज अधिक मिलता है, तो बड़े निवेशक सोने के बजाय इनमें पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि सोना अपने आप कोई ब्याज या नियमित आय नहीं देता, जबकि सरकारी बॉन्ड से रिटर्न मिलता है।इसके विपरीत, जब बॉन्ड की यील्ड कम होने लगती है, तो सोने में निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में आने वाला बदलाव अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मार्केट के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
यील्ड में गिरावट से सोने को मिल सकता है फायदा
पिछले कुछ समय से अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का रुझान सोने से हटकर सरकारी बॉन्ड की ओर बढ़ा था। इसका दबाव सोने की कीमतों पर भी पड़ा।अब अमेरिकी चुनाव के बाद सरकारी खर्च और कर्ज को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया है। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड में गिरावट का रुख दिखाई देने लगा है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर से नीचे आकर करीब 4.85 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।इस घटनाक्रम से निवेशकों के लिए सोना दोबारा आकर्षक विकल्प बन सकता है। यदि बॉन्ड यील्ड में गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले समय में सोने की कीमतों को मजबूती मिल सकती है।
बड़े निवेशक तय करते हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा
सोने की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव के पीछे केंद्रीय बैंक, अंतरराष्ट्रीय निवेश संस्थान, बड़े फंड और वित्तीय कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ये संस्थाएं बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी और बिक्री करती हैं।त्योहारों और शादी के अवसर पर भारतीय परिवारों की खरीदारी घरेलू बाजार में मांग को प्रभावित करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों की दिशा तय करने में बड़े निवेशकों की गतिविधियां भी अहम रहती हैं।जब संस्थागत निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाते हैं, तो कीमतों पर दबाव बन सकता है। वहीं, बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न घटने पर वे फिर से सोने की तरफ रुख कर सकते हैं।
शेयर बाजार में भी क्यों लौट रही है तेजी?
सोने के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी मजबूती आने की चर्चा है। इसके पीछे विदेशी निवेशकों के रुख में संभावित बदलाव को एक अहम वजह माना जा रहा है।जब अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजार में निवेश कर सकते हैं। लेकिन बॉन्ड की यील्ड घटने पर शेयर बाजार जैसे दूसरे निवेश विकल्प फिर आकर्षक लगने लगते हैं।ऐसे में विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी की उम्मीद भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा दे सकती है। हालांकि, शेयर बाजार की चाल पर घरेलू आर्थिक हालात, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना चाहिए?
धनतेरस पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर खरीदारी का उद्देश्य शादी, पारिवारिक जरूरत या त्योहार के लिए आभूषण लेना है, तो केवल कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण खरीदारी टालना जरूरी नहीं है।वहीं, निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वालों को बाजार की मौजूदा स्थिति और अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। एक ही समय पर पूरी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग चरणों में निवेश करना जोखिम को संतुलित करने का विकल्प हो सकता है।निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ और अन्य विनियमित गोल्ड निवेश विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करना भी जरूरी है।
आगे कैसी रह सकती है सोने की चाल?
आने वाले महीनों में सोने की कीमतों का रुख कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों को लेकर फैसले, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।फिलहाल बाजार में सोने को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कीमतें लगातार बढ़ती ही रहेंगी। निवेशकों को किसी एक चुनावी नतीजे या बाजार के अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।कुल मिलाकर, धनतेरस से पहले सोने में लौटी तेजी ने बाजार का माहौल जरूर बदल दिया है। ऐसे में खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी है कि वे अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर फैसला लें।


