छत्तीसगढ़ में अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, 14 राज्यों में 176 केस ,पश्चिम बंगाल से मुख्य सरगना समेत 3 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ : मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। साइबर अपराध के खिलाफ जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल से गिरोह के कथित मुख्य सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े एक वर्चुअल बैंक खाते के जरिए देशभर में 1 लाख 71 हजार से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया गया। इस खाते से जुड़े 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 176 आपराधिक प्रकरण दर्ज पाए गए हैं।
3.12 लाख रुपये की ठगी से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत खड़गांव थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 06/26 से हुई थी। यह प्रकरण बीएनएस की धारा 318(4) के तहत दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक पीड़ित से 3 लाख 12 हजार 348 रुपये की ठगी हुई थी। रकम अलग-अलग नौ बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई थी।जांच के दौरान पुलिस ने इन खातों और लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया। इसी क्रम में वर्चुअल बैंक खाता संख्या 211071614 सामने आया, जिसमें पीड़ित की रकम में से 60 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
एक खाते की जांच से सामने आया बड़ा नेटवर्क
पुलिस ने जब इस वर्चुअल बैंक खाते से जुड़े लेन-देन और शिकायतों की विस्तृत जांच की तो साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस खाते से देशभर में 1 लाख 71 हजार से अधिक लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी मिली है।जांच में इस खाते से जुड़े 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 176 एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई। इनमें कर्नाटक में सबसे ज्यादा 54 मामले मिले। बिहार में 46 और तेलंगाना में 28 प्रकरण दर्ज पाए गए। उत्तर प्रदेश में 10, केरल में आठ, महाराष्ट्र में सात तथा हरियाणा और तमिलनाडु में छह-छह मामले सामने आए। दिल्ली में चार और पश्चिम बंगाल में तीन मामले दर्ज मिले। इसके अलावा अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान में एक-एक एफआईआर मिली।
छत्तीसगढ़ में भी 31 शिकायतें दर्ज
पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का असर स्थानीय स्तर पर भी सामने आया है। जिले के अलग-अलग थानों में गिरोह से संबंधित 31 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है।इनमें अंबागढ़ चौकी थाना क्षेत्र की 15, खड़गांव की नौ, मोहला की तीन, मानपुर की दो तथा गोटाटोला और मदनवाड़ा थानों की एक-एक शिकायत शामिल है।
लोकेशन बदलकर गिरफ्तारी से बच रहे थे आरोपी
पुलिस के सामने आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। जांच में पता चला कि नेटवर्क से जुड़े आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। अलग-अलग राज्यों की पुलिस भी इनकी तलाश कर रही थी।जिला पुलिस की विशेष टीम ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन, वर्चुअल खाते और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। लगातार मिले इनपुट के आधार पर टीम पश्चिम बंगाल पहुंची और 30 सितंबर 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आदित्य रजक को बताया गया मुख्य सरगना
गिरफ्तार आरोपियों में आदित्य रजक को पुलिस ने गिरोह का मुख्य सरगना बताया है। वह पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के उत्तरपारा थाना क्षेत्र के कोननगर नवोग्राम का निवासी बताया गया है।उसके साथ कृष्णा चौधरी और सुमन वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के टीटागढ़ थाना क्षेत्र में महावीर मंदिर के पास वार्ड नंबर छह के निवासी बताए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया।
अन्य खातों और आरोपियों की भूमिका की जांच जारी
पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े दूसरे बैंक खातों, लेन-देन और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। साइबर ठगी से हासिल रकम को किन माध्यमों से आगे भेजा जाता था और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।इस कार्रवाई में प्रशिक्षु उप निरीक्षक अब्दुल रियाज, सहायक उप निरीक्षक धन सिंह महिलांगे, आरक्षक आशीष जोगी, आरक्षक नर्मदा प्रसाद पैकरा, महिला सहायक आरक्षक सरिता जाड़े और जिला साइबर सेल की टीम की भूमिका रही।
पुलिस ने साइबर ठगी से बचने की दी सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अनजान बैंक खातों, संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़े किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव के झांसे में नहीं आने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी होने पर तुरंत नजदीकी थाने या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए, ताकि लेन-देन को जल्द ट्रैक कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।




