छत्तीसगढ़

युक्तियुक्तकरण नीति को हाई कोर्ट की मंजूरी, शिक्षकों की सभी याचिकाएं खारिज

 छत्तीसगढ़ :  सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और शालाओं के युक्तियुक्तकरण को लेकर राज्य सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने इस नीति को वैध ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर 24 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय जनहित में लिया गया है।

सरकार की नीति को बताया जनहित में

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्य के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूल लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों का तर्कसंगत और संतुलित वितरण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी उद्देश्य से युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया लागू की गई है।

16 हजार से अधिक शिक्षकों का हुआ युक्तियुक्तकरण

सरकार की ओर से लागू की गई इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। साथ ही 10,463 शालाओं को इस नीति के दायरे में लाया गया, जिनमें एक ही परिसर में संचालित 10,297 स्कूल प्रमुख रूप से शामिल हैं।

स्थानांतरण और पदस्थापना सरकार का अधिकार

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण और पदस्थापना प्रशासनिक निर्णय हैं, जो सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी को किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से पदस्थ रहने का संवैधानिक या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है।

शिक्षक संगठनों की सभी याचिकाएं निरस्त

अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों और शिक्षकों की ओर से दायर 24 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति पर लगी कानूनी रोक की आशंकाएं समाप्त हो गई हैं।

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