संशोधन बिल लोकसभा में पेश, पेपर लीक करने पर 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान ; हंगामे के कारण दोनों सदन स्थगित

नई दिल्ली। देश में पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश किया। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पेपर लीक पर 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की भूमिका सामने आती है तो उसे 8 साल तक ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
कंपनी के डायरेक्टर या मैनेजर के दोषी पाए जाने पर भी 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, पेपर लीक में शामिल कोचिंग संस्थानों पर भी सख्त कार्रवाई और संपत्ति जब्ती का प्रावधान प्रस्तावित है।
विपक्ष के हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही स्थगित
बिल पेश किए जाने के दौरान संसद में विपक्ष के हंगामे का दौर जारी रहा। हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और FIR को लेकर सरकार से सवाल किए। वहीं कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए सरकार का कदम सही है। उन्होंने छात्रों के हित में जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की।
नंदन नीलेकणी की अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाली छह सदस्यीय समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने को लेकर सरकार को सुझाव देगी। सरकार का कहना है कि नए कानून और टास्क फोर्स का उद्देश्य पेपर लीक पर रोक लगाना, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।


