छत्तीसगढ़

बस्तर में शिक्षा विभाग की बड़ी चूक, 485 छात्रों को मिली गलत मार्कशीट, अधिकारी से मांगा गया जवाब

 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां कक्षा 5वीं और 8वीं के 485 विद्यार्थियों को गलत अंकसूचियां जारी कर दी गईं। मामले के सामने आने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने परीक्षा कार्य के नोडल अधिकारी रहे सहायक खंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।अधिकारी से एक दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने और तय समय सीमा में सभी गलतियों को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

परीक्षा परिणामों की समीक्षा में सामने आई गड़बड़ी

पूरा मामला केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा 2026 से जुड़ा हुआ है। बस्तर विकासखंड में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई कई अंकसूचियों में गंभीर त्रुटियां पाई गईं।13 जुलाई को आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में परीक्षा परिणाम और अंकसूची सुधार कार्यों की जांच की गई। इस दौरान विकासखंड से भेजी गई कई मार्कशीट में गलतियां सामने आईं, जिसके बाद अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए थे।

एबीईओ को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस

विकासखंड शिक्षा अधिकारी भारती देवांगन ने परीक्षा कार्य के नोडल अधिकारी रहे सहायक खंड शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विद्यार्थियों से जुड़ी महत्वपूर्ण दस्तावेजों में इतनी बड़ी त्रुटि गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।नोटिस में अधिकारी से एक दिन के अंदर जवाब मांगा गया है, जबकि तीन दिन के भीतर सभी गलत अंकसूचियों को सुधारकर संशोधित अंकसूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

समय पर सुधार नहीं होने पर होगी कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अनुसार, संबंधित अधिकारी को गलतियों को सुधारने के लिए पहले भी मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।विभाग ने इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही माना है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा में सुधार कार्य पूरा नहीं किया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के तहत विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

गलत अंकसूची मिलने से विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। शिक्षा विभाग ने अब संशोधित अंकसूचियां तैयार कर जल्द विद्यार्थियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में बच्चों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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