Bilaspur News: चर्च कमेटी पर गंभीर आरोप, कोर्ट के आदेश के बाद पादरी समेत 7 लोगों पर एफआईआर दर्ज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक ईसाई परिवार के कथित सामाजिक बहिष्कार का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। न्यायालय के निर्देश के बाद कोटा थाना पुलिस ने सीएनआई चर्च कमेटी से जुड़े पादरी समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला धार्मिक समुदाय के भीतर कथित उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ा बताया जा रहा है।
परिवार को समाज से अलग करने का आरोप
मामला कोटा थाना क्षेत्र का है, जहां हरीश लाल और उनके परिवार ने चर्च कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, कमेटी ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और लोगों से अपील की कि वे उनसे किसी प्रकार का संपर्क न रखें। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के माध्यम से भी परिवार से दूरी बनाए रखने का संदेश प्रसारित किया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस फैसले से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भारी प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
पुलिस से राहत नहीं मिली तो कोर्ट पहुंचे
पीड़ित परिवार ने सबसे पहले कोटा थाना में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
सात आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
कोर्ट के आदेश के पालन में पुलिस ने सौरभ पीटर्स, राजा सालोमान दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स, सुलेमान दास और पास्टर मनीष आर. मसीह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की नफरत फैलाने, धमकी देने तथा नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पीड़ित ने सुनाई दो साल की आपबीती
पीड़ित हरीश लाल का आरोप है कि चर्च की नई कमेटी बनने के बाद से पिछले दो वर्षों से उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 17 जनवरी को चर्च में आयोजित बैठक के दौरान उन पर क्रिसमस और ईस्टर जैसे धार्मिक आयोजनों का अपमान करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद कमेटी ने उन्हें और उनके परिवार को ‘नॉट इन गुड स्टैंडिंग’ घोषित करते हुए समुदाय से अलग कर दिया।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस न्यायालय के निर्देश के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




