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टेलिंग डैम के नीचे बसे 10 परिवारों के मकान हटाए गए, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला बुलडोजर

टेलिंग डैम के नीचे बसे 10 परिवारों के मकान हटाए गए, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला बुलडोजर
धसकन और जान-माल के खतरे को देखते हुए प्रशासन की कार्रवाई, परिवारों को आदिवासी भवन में किया गया शिफ्ट
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई,

दुर्जन सिंह

बचेली- नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-08 स्थित एनएमडीसी के टेलिंग डैम के नीचे करीब 10-15 वर्षो से निवासरत 10 गरीब परिवारो के मकानों को 14 जून, रविवार को प्रशासन ने खाली कराकर ध्वस्त कर दिया। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) राजीव कुजूर के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था की कमान थाना प्रभारी प्रह्लाद कुमार साहू ने संभाली।


प्रशासन के अनुसार संबंधित परिवार वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से निवास कर रहे थे और उन्हें लंबे समय से हटने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे थे। एसडीएम ने बताया कि वन विभाग द्वारा भी वर्ष 2017 से लगातार नोटिस दिए जा रहे थे, वहीं प्रशासन की ओर से भी पिछले दो-तीन महीनों से क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए जा रहे थे। यह कार्रवाई एसडीएम न्यायालय के आदेश के तहत की गई। सुरक्षा को देखते हुए बचेली थाना प्रभारी के अलावा किंरदुल, दंतेवाड़ा, भांसी, गीदम, बारसूर, तीन एसडीओपी के अलावा थाना प्रभारी, बड़ी संख्या में पुलिस बल एंव महिला पुलिस बल भी तैनात रहे। सुबह 8 बजे शाम 6 बजे तक यह कार्रवाही चली। इसके अलावा बचेली तहसीलदार महेश कश्यप, सीएमओ पीटीएम कृष्णा राव भी मौजूद रहे।


जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में टेलिंग डैम के दूसरे हिस्से में धसकन की घटना हुई थी, जिसकी चपेट में बीटीओए के कई वाहन भी आ गए थे। इसके बाद विशेषज्ञों और सर्वे टीम द्वारा क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि डैम के नीचे और आसपास निवास करने वाले परिवार संभावित खतरे की जद में हैं तथा भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से जान-माल की हानि हो सकती है। सर्वे रिपोर्ट एनएमडीसी द्वारा प्रशासन को सौंपी गई थी, जिसके आधार पर प्रभावित क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।


इस कार्रवाई से पहले पीड़ित परिवार द्वारा समय की मोहलत देने एवं उनके ही पुनर्वास को लेकर मंाग भी की गई थी।
कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने बरसात के मौसम में अपने पुनर्वास को लेकर चिंता जताई। बताया गया कि प्रभावित 10 परिवारों में तीन घरों की महिलाएं गर्भवती हैं। इस संबंध में एसडीएम राजीव कुजूर ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को फिलहाल अस्पताल में रखा जाएगा तथा बाद में उन्हें अक्टूबर 2026 तक एनएमडीसी के क्वार्टर में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। एनएमडीसी से क्र्वाटर देने की मंाग की जायेगी। वहीं अन्य प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से आदिवासी भवन में ठहराया गया है। प्रशासन ने एनएमडीसी प्रबंधन से चर्चा कर कुछ महीनों के लिए पुराने क्वार्टर अथवा अन्य वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने का भी आग्रह करेगी।

प्रशासन के अनुसार प्रभावित परिवारों को कुल लगभग 35 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। परिवारों की पात्रता और मूल्यांकन के आधार पर किसी को डेढ़ लाख, किसी को तीन लाख तथा कुछ परिवारों को सात लाख रुपये तक की सहायता राशि मिलने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र खाली होने के बाद सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए टेलिंग डैम के समीप एनएमडीसी द्वारा रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण किया जाएगा, ताकि भविष्य में धसकन या अन्य संभावित खतरों को रोका जा सके।

अन्य प्रभावित क्षेत्रों पर भी नजर
कार्रवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि पुराने मार्केट क्षेत्र और काठमांडू बस्ती में निवासियेा केा बसाने के लिए बनाये गये क्र्वाटर के कुछ हिस्से भी टेलिंग डैम के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। इस पर एसडीएम ने कहा कि संबंधित क्षेत्रों की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी

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