जेल में मौत का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, डीजीपी और गृह सचिव से मांगा जवाब; मुआवजे पर भी उठाए सवाल

बिलासपुर : केंद्रीय जेल में एक बंदी की मौत से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब देने के लिए तलब किया है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह जानने की इच्छा जताई कि हिरासत में हुई मौत के मामले में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई है। अदालत ने विशेष रूप से पूछा है कि क्या इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक जांच किस स्तर तक पहुंची है।
पत्नी और बेटियों ने न्याय के लिए खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
मृतक श्रवण सूर्यवंशी की पत्नी और उनकी दो नाबालिग बेटियों ने विशेष अनुमति याचिका दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और उचित मुआवजे की मांग की है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
आबकारी मामले में गिरफ्तारी के बाद हुई थी मौत
मामले के अनुसार, जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी कानून से जुड़े एक प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें केंद्रीय जेल भेजा गया। कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर चोट की बात
मृत्यु के बाद कराई गई न्यायिक जांच में यह उल्लेख किया गया कि सिर में गंभीर चोट लगने से उत्पन्न जटिलताओं के कारण मौत हुई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद परिजनों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और बड़े मुआवजे की मांग उठाई थी।
एक लाख रुपये मुआवजे को लेकर अदालत ने जताई चिंता
इस मामले में हाईकोर्ट ने परिवार को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान इस राशि को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने संकेत दिया कि परिवार को हुई क्षति और परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए यह राशि पर्याप्त प्रतीत नहीं होती।
सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी अदालत
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र पर भी सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया। अदालत का कहना था कि दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हिरासत में मौत के मामले में आपराधिक जांच या एफआईआर को लेकर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
4 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी, जब डीजीपी और गृह सचिव वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित होकर सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में मामले की जांच, जवाबदेही और मुआवजे से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हो सकती है।




