तारा कोल ब्लॉक पर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमाई, भूपेश बघेल ने CM साय को दी खुली बहस की चुनौती; बोले- आमने-सामने साफ हो जाएगा किसने क्या किया

छत्तीसगढ़ : तारा कोल ब्लॉक की स्वीकृति और नीलामी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। अंबिकापुर में मीडिया से चर्चा के दौरान बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री और वह दोनों मीडिया के सामने बैठकर तारा कोल ब्लॉक से जुड़े फैसलों पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं।
बघेल बोले- सामने बैठकर हो फैसलों पर चर्चा
भूपेश बघेल के मुताबिक, खुली बहस में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर किस सरकार के कार्यकाल में कौन सा फैसला लिया गया और अलग-अलग स्तर पर क्या स्वीकृतियां दी गईं। उनका कहना है कि बहस के बाद इस मामले को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग दावों की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने आ जाएगी।
PM आवास योजना पर विजय शर्मा से हुई बहस का दिया उदाहरण
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी चुनौती को हाल ही में रायपुर प्रेस क्लब में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ हुई बहस से जोड़कर बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंच पर अपनी-अपनी बात रखी थी, उसी तरह तारा कोल ब्लॉक को लेकर भी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ चर्चा की जा सकती है।
प्रेस क्लब में बहस का दिया सीधा निमंत्रण
बघेल ने मुख्यमंत्री साय से प्रेस क्लब में आने और तारा कोल ब्लॉक के मुद्दे पर आमने-सामने बहस करने की बात कही है। उनके अनुसार, इससे कोयला खदान की स्वीकृति और नीलामी को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा की ओर से किए जा रहे दावों को समझने में मदद मिलेगी।तारा कोल ब्लॉक का मामला हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन से जुड़े व्यापक राजनीतिक विवाद से भी जुड़ा है। इस मुद्दे पर दोनों दलों की ओर से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं।
हसदेव-अरण्य को लेकर बघेल ने क्या कहा
भूपेश बघेल का दावा है कि उनके मुख्यमंत्री रहते उनकी सरकार ने हसदेव-अरण्य क्षेत्र में नई कोयला खदानों के आवंटन और नीलामी का विरोध किया था। उन्होंने 15 सितंबर को भी साय सरकार से केंद्र के समक्ष तारा कोल ब्लॉक की नीलामी रद्द कराने के लिए पहल करने की मांग की थी।अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सीधे बहस की चुनौती दिए जाने के बाद तारा कोल ब्लॉक का मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ गया है।




