नृत्य परिचय एवं बायोडाटा : अदिशा नंदा

उभरती हुई ओडिसी नृत्यांगना
अदिशा नंदा एक उभरती हुई ओडिसी नृत्यांगना हैं, जिन्होंने कम समय में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा के प्रति अपनी रुचि, लगन, अनुशासन और समर्पण से अपनी एक विशेष पहचान बनानी शुरू की है।
अदिशा पिछले डेढ़ वर्ष से ओडिसी नृत्य का नियमित एवं विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। वे गुरु आर्या नंदे (International Odissi Nrityangana) के मार्गदर्शन में Nrityashreedhara Odissi Dance Academy, Kalakendra, Raipur, Chhattisgarh से ओडिसी नृत्य की शिक्षा ले रही हैं।
गुरु के सान्निध्य में अदिशा ओडिसी नृत्य की शास्त्रीय तकनीक, चौका, त्रिभंगी, हस्त-मुद्राएँ, ताल-लय, भाव-अभिनय, अंग-संचालन एवं मंचीय प्रस्तुति की बारीकियों का निरंतर अभ्यास कर रही हैं।
प्रशिक्षण एवं गुरु-मार्गदर्शन
गुरु:
गुरु आर्या नंदे
International Odissi Nrityangana
नृत्य संस्था:
Nrityashreedhara Odissi Dance Academy
(Kalakendra, Raipur, Chhattisgarh)
गुरु आर्या नंदे के मार्गदर्शन में अदिशा ओडिसी नृत्य की पारंपरिक शैली एवं शास्त्रीय अनुशासन को समझते हुए निरंतर अपनी तकनीक, भाव-अभिव्यक्ति और मंचीय आत्मविश्वास को विकसित कर रही हैं।
प्रमुख मंचीय एवं सांस्कृतिक सहभागिताएँ
अदिशा ने अपनी नृत्य-यात्रा के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिताओं, नृत्य महोत्सवों, सांस्कृतिक आयोजनों एवं प्रतिष्ठित मंचों पर सहभागिता एवं प्रस्तुति दी है।
राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिताएँ
- AIDA — All India Dance Association
- रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिताएँ
- जयपुर, मध्य प्रदेश में आयोजित नृत्य प्रतियोगिता/आयोजन
- नागपुर, महाराष्ट्र में आयोजित नृत्य प्रतियोगिताएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रमुख नृत्य महोत्सव एवं सांस्कृतिक आयोजन
- देबास्मृति दास महोत्सव — भुवनेश्वर, ओडिशा
- कौशल महोत्सव
- शिवांजलि
- नटरंग
- नाद निरंजन
इन विभिन्न मंचों पर सहभागिता एवं प्रस्तुति के माध्यम से अदिशा को अनुभवी कलाकारों और कला-संस्कृति से जुड़े प्रतिष्ठित मंचों के साथ सीखने एवं अपनी प्रस्तुति-कौशल को विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
शासकीय एवं प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रम
गुरु आर्या नंदे के मार्गदर्शन में अदिशा ने विभिन्न शासकीय एवं प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में भी सहभागिता की है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- रजत महोत्सव
- पावस प्रसंग
- विभिन्न शासकीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
- विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर ओडिसी नृत्य प्रस्तुतियाँ
विशेष मंचीय सहभागिता
41वाँ चक्रधर समारोह — रायगढ़
अदिशा नंदा को 41वें चक्रधर समारोह, रायगढ़ जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच पर गुरु आर्या नंदे एवं समूह के साथ ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ।
दिनांक: 21 सितंबर 2026
स्थान: रामलीला मैदान, रायगढ़
यह मंचीय सहभागिता अदिशा की नृत्य-यात्रा का एक महत्वपूर्ण अनुभव रही, जिसने उन्हें बड़े सांस्कृतिक मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने और मंचीय आत्मविश्वास को और मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।
ओडिसी नृत्य के प्रति समर्पण
ओडिसी भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है, जिसकी समृद्ध परंपरा ओडिशा की मंदिर संस्कृति से जुड़ी हुई है। चौका, त्रिभंगी, हस्त-मुद्राएँ, भाव-अभिनय, ताल एवं लय ओडिसी नृत्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
अदिशा नंदा इस समृद्ध शास्त्रीय परंपरा को सीखने के प्रति निरंतर समर्पित हैं। वे नियमित अभ्यास एवं गुरु-मार्गदर्शन के माध्यम से अपनी नृत्य तकनीक, भाव-अभिव्यक्ति, लयबद्धता और मंचीय प्रस्तुति को निरंतर निखार रही हैं।
विभिन्न प्रतियोगिताओं, नृत्य महोत्सवों एवं सांस्कृतिक मंचों पर सहभागिता ने उनके भीतर कला के प्रति आत्मविश्वास, अनुशासन और सीखने की भावना को और मजबूत किया है।
भविष्य की आकांक्षा
अदिशा नंदा का लक्ष्य ओडिसी नृत्य में निरंतर उच्च स्तर की शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर एक कुशल, प्रतिष्ठित एवं समर्पित ओडिसी नृत्यांगना के रूप में अपनी पहचान स्थापित करना है।
वे आने वाले समय में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित मंचों पर ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियाँ देना चाहती हैं। अपने गुरु आर्या नंदे के मार्गदर्शन में वे नृत्य की बारीकियों, भाव-अभिनय, शास्त्रीय अनुशासन एवं पारंपरिक शैली को और अधिक गहराई से सीखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
अदिशा का सपना है कि वे अपनी कला के माध्यम से ओडिसी नृत्य की समृद्ध भारतीय परंपरा एवं संस्कृति को देश-विदेश तक पहुँचाएँ और आने वाली पीढ़ियों को भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की इस सुंदर विरासत से जोड़ने में अपना योगदान दें।
“नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि संस्कृति, साधना और भावों की अभिव्यक्ति है।”
अदिशा इसी भावना के साथ निरंतर अभ्यास, सीख और साधना की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और अपने गुरु के मार्गदर्शन में ओडिसी नृत्य की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।





