छत्तीसगढ़

रायपुर में बाबा रामदेव ने उठाया ऐसा सवाल, बच्चों की पढ़ाई और समाज में बढ़ती दूरी को लेकर कही बड़ी बात

 रायपुर : गुरु बाबा रामदेव ने देश में सामाजिक सद्भाव और बच्चों की शिक्षा को लेकर अपनी बात रखी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को अपने अस्तित्व को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध समेत सभी धार्मिक समुदायों के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्ग और आदिवासी समाज भी देश का अभिन्न हिस्सा हैं।

बाबा रामदेव ने लोगों से अपील की कि किसी समुदाय को खतरे में बताकर समाज में भय पैदा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की मजबूती अलग-अलग पहचानों के बीच टकराव में नहीं, बल्कि आपसी एकता और सहयोग में है।

बच्चों को आंदोलन में लाने पर क्यों उठे सवाल

बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने विरोध प्रदर्शनों में छोटे बच्चों की भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को आंदोलनों और प्रदर्शनों में शामिल किया जाएगा तो उनकी पढ़ाई पर इसका क्या असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कम उम्र के बच्चों में किसी विरोध प्रदर्शन के उद्देश्य, मुद्दे और उसके सामाजिक या राजनीतिक संदर्भ को समझने की पर्याप्त क्षमता नहीं होती। ऐसे में उन्हें इस तरह की गतिविधियों में शामिल करने के बजाय उनकी शिक्षा और विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

शिक्षा और संस्कार को बताया बच्चों की सबसे बड़ी जरूरत

बाबा रामदेव ने कहा कि बचपन का समय पढ़ाई, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस उम्र में बच्चों को सामाजिक या राजनीतिक टकराव से जुड़ी गतिविधियों में शामिल करने के बजाय उन्हें बेहतर शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए।

उनके अनुसार बच्चों का भविष्य किसी भी आंदोलन या तत्कालीन विवाद से ज्यादा महत्वपूर्ण है। छोटी उम्र में पढ़ाई प्रभावित होने का असर आगे चलकर उनके विकास पर पड़ सकता है।

विविधता को लेकर भी दिया एकता का संदेश

योग गुरु ने देश के अलग-अलग धर्मों, जातियों और सामाजिक वर्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता के साथ-साथ एकता से भी है। उनका कहना था कि किसी भी वर्ग के बारे में लगातार भय का माहौल बनाना सामाजिक रूप से उचित नहीं है।

उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने और अलग-अलग समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने से बचने की बात कही। उनके मुताबिक देश को आगे ले जाने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

रायपुर से उठी बात ने फिर छेड़ी दो अहम मुद्दों पर चर्चा

बाबा रामदेव के बयान के बाद बच्चों की आंदोलनों में भागीदारी और समाज में समुदायों की सुरक्षा को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है। उनके बयान का मुख्य जोर बच्चों की शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर रहा।

उन्होंने खास तौर पर प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखने की बात कही और लोगों से अपील की कि सामाजिक मतभेदों को बढ़ाने के बजाय देशहित और आपसी सहयोग की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

Related Articles

Back to top button