छत्तीसगढ़

Supreme Court News: अनुकंपा नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- यह अधिकार नहीं, सिर्फ आपात राहत की व्यवस्था

 बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह किसी भी आश्रित का कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल उस परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है, जिसने सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु के कारण अचानक अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया हो।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ से जुड़े एक मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।

क्या था पूरा मामला?

रायपुर निवासी अंकित कुमार नाविक ने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके पिता स्वर्गीय हरीकिशन नाविक बलौदाबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत थे। 7 नवंबर 2011 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया।उस समय अंकित नाबालिग थे और उनकी उम्र करीब 15 वर्ष 8 महीने थी। वहीं उनकी मां पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत थीं और परिवार को पारिवारिक पेंशन का भी लाभ मिल रहा था।

बालिग होने के बाद किया आवेदन

अंकित ने वयस्क होने और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के बाद 20 जनवरी 2015 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया।इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने दोबारा आवेदन किया, लेकिन विभाग ने विलंब का वही आधार बताते हुए दूसरी बार भी नियुक्ति देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

विभागीय निर्णय के खिलाफ अंकित ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने आवेदन में देरी और परिवार में पहले से सरकारी नौकरी होने के आधार पर याचिका खारिज कर दी।इसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने 4 नवंबर 2025 को अपील भी निरस्त कर दी। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य आर्थिक संकट से तत्काल राहत देना है, न कि भविष्य में रोजगार का स्थायी अवसर उपलब्ध कराना।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अंकित कुमार नाविक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई वैधानिक आधार नहीं बनता और इसी के साथ एसएलपी खारिज कर दी।

फैसले की तीन अहम बातें

तात्कालिक राहत ही अनुकंपा नियुक्ति का आधार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है। यदि लंबे समय बाद आवेदन किया जाता है तो इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य समाप्त हो जाता है।

सहानुभूति से नहीं मिल सकती नौकरी

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मानवीय सहानुभूति के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। नियुक्तियां संबंधित सरकारी नियमों और नीतियों के अनुसार ही होंगी। न्यायालय नियमों में बदलाव नहीं कर सकता।

परिवार में कमाने वाला सदस्य होने पर दावा कमजोर

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है और परिवार की आजीविका का साधन उपलब्ध है, तो अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार करना उचित नहीं माना जा सकता।इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जाने वाली सीमित राहत है।

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