छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री की पहल से टला बड़ा विवाद, जामड़ी पाट में आदिवासी समाज ने वर्षों बाद परंपरा के अनुसार किया धार्मिक अनुष्ठान

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के जामड़ी पाट में लंबे समय से चला आ रहा विवाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हस्तक्षेप के बाद शांत हो गया। यहां रहने वाले करीब 75 आदिवासी परिवार अपनी पारंपरिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति की मांग कर रहे थे। मामला लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा था और क्षेत्र में आंदोलन तथा चक्का जाम जैसी स्थिति बन गई थी। समय रहते प्रशासन की सक्रियता से विवाद का समाधान निकाल लिया गया।

खुफिया रिपोर्ट के बाद सरकार हुई सतर्क

सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि कुछ तत्व आदिवासी समाज और सनातन समुदाय के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया जाता तो मामला गंभीर रूप ले सकता था। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। प्रशासन की पहल के बाद चक्का जाम समाप्त कराया गया और हालात सामान्य हुए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरी हुई आदिवासी समाज की मांग

बताया गया कि कुछ दिन पहले आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर जामड़ी पाट में अपने पारंपरिक देवस्थल पर पूजा-अर्चना और जलकैना में धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति देने की मांग रखी थी। समाज की धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने बालोद जिला प्रशासन को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जलकैना में परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ धार्मिक अनुष्ठान

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन की मौजूदगी में जामड़ी पाट स्थित जलकैना में आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया। इस दौरान समाज के लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिला और उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी जताया।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश

इस फैसले को केवल धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक आस्था के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन की समय पर कार्रवाई से संभावित विवाद टल गया और क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द का माहौल बना रहा।

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